पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी एक बार फिर दुनिया के सामने जम्मू-कश्मीर को लेकर रोना रो रहे हैं. दोनों पाकिस्तानी नेताओं ने सोमवार (13 जुलाई) को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के तहत कश्मीर के समाधान का समर्थन करने की मांग की है. ये अपील ऐसे समय में की गई है जब पाकिस्तान कथित तौर पर कश्मीर शहीद दिवस मना रहा है.
बता दें कि पाकिस्तान हर साल प्रोपेगैंडा करते हुए 13 जुलाई को कथित तौर पर कश्मीर शहीद दिवस मनाता है, जिसका एकमात्र मकसद भारत के खिलाफ दुनियाभर में पाकिस्तानी एजेंडा फैलाना है. शहबाज शरीफ ने इस मौके पर कहा, “पाकिस्तानी सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अपने अटूट राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन को दोहराती है. हम आत्मनिर्णय के उनके जन्मजात अधिकारों को हासिल करने के उनके न्यायपूर्ण संघर्ष में पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं, जैसा कि UNSC प्रस्तावों में निहित है.”
शरीफ के बयान में आगे कहा गया कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के अनुसार जम्मू-कश्मीर विवाद के शांतिपूर्ण समाधान पर निर्भर करती है. इसके साथ ही उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करने के लिए भारत पर दबाव डालने की अपील की है.
अफवाह फैलाने में लगे जरदारी
शहबाज शरीफ के बाद पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी तो अलग ही अफवाह फैलाने में लगे हैं. जरदारी ने कहा, “आज 95वें कश्मीर शहीद दिवस पर मैं उन 22 कश्मीरी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. पाकिस्तान के लोग 1931 के शहीदों के बलिदान को याद करने में अपने कश्मीरी भाइयों के साथ शामिल हैं.”
‘कश्मीरियों को बंधक बना रखा’
भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए जरदारी जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की मौजूदगी का रोना रोने लगे. उन्होंने कहा कि 9 लाख भारतीय सशस्त्र बल कब्जा जारी रखते हुए कश्मीरियों को बंधक बनाए हुए हैं. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म करने के भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले को लेकर भी जरदारी तिलमिलाते नजर आए. उन्होंने इसे कश्मीरी लोगों की पहचान छीनने और उन्हें अल्पसंख्यक में बदलने का प्रयास बताया.
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