US से तनाव के बीच ईरान का बड़ा कदम, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले शख्स को फांसी पर लटकाया

US से तनाव के बीच ईरान का बड़ा कदम, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले शख्स को फांसी पर लटकाया


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  • इन विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोग मारे गए थे।

पश्चिम एशिया में अमेरिका के साथ एक बार फिर से बढ़ते संघर्ष और तनाव के बीच ईरान ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, लेकिन यह कार्रवाई किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं, बल्कि ईरानी कानून के तहत एक शख्स को फांसी देने की है. दरअसल, ईरान ने इस साल जनवरी महीने में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में कथित भूमिका निभाने के आरोप में दोषी ठहराए गए एक शख्स को फांसी दे दी है.

ईरान की न्यायपालिक के मुताबिक, जिस शख्स को फांसी दी गई, उस पर सर्दियों के दौरान देशभर में फैले विरोध प्रदर्शनों में कथित रूप से शामिल होने का दोषी पाया गया था. ईरानी न्यायपालिका की प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया, मोहम्मद अमीनी देहघानी को दुश्मन का सहायक बताया गया. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इस मामले की पूरी तरह से पुष्टि हो जाने के बाद बुधवार (15 जुलाई, 2026) की सुबह में उसे फांसी दे दी गई.

शख्स को किन-किन अपराधों में ठहराया गया दोषी?

रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद अमीनी देहघानी को मोहरेबेह (खुदा के खिलाफ जंग करने) और धरती पर भ्रष्टाचार फैलाने जैसे आरोपों में दोषी ठहराया गया था. ये आरोप ईरान के कानून के तहत गंभीर अपराध माने जाते हैं.

ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, मोहम्मद अमीनी देहघानी ने 9 जनवरी को देहघान शहर में गवर्नर के ऑफिस के बाहर मोलोटोव कॉकटेल फेंका था, जिससे वहां आग लग गई और इससे सार्वजनकि संपत्ति के साथ-साथ शहर के पुलिस थाने को भी काफी नुकसान पहुंचा था. 

ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए तीन हजार से ज्यादा लोग

वहीं, पिछले साल 2025 के दिसंबर महीने के आखिर में ईरान में बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन तेजी से देशभर में फैल गए थे. बाद में इन विरोध प्रदर्शनों ने राजनीतिक मांगों का भी रूप ले लिया. इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर ईरानी सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की, जिसे लेकर मानवाधिकार संगठनों की तरफ से कहा जाता है कि इसमें हजारों लोगों को मारा गया है.

ईरानी अधिकारियों ने इन घटनाओं को अमेरिका और इजरायल के समर्थन से भड़काया गया दंगा करार दिया और दावा किया कि हिंसा में करीब 3000 लोगों की मौत हुई. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इन घटनाओं में मरने वालों की संख्या इससे काफी ज्यादा बताई है. उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, इससे भारी संख्या में लोग मारे गए. 

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