एवोकाडो फार्मिंग कैसे दिला रही किसानों को मुनाफा, खुद पीएम ने भी किया जिक्र

एवोकाडो फार्मिंग कैसे दिला रही किसानों को मुनाफा, खुद पीएम ने भी किया जिक्र


कभी भारत में बहुत कम लोग जानते थे कि एवोकाडो नाम का कोई फल भी होता है, लेकिन आज यही फल शहरों की डाइनिंग टेबल से लेकर हेल्थ कॉन्शियस लोगों की डाइट तक हर जगह छाया हुआ है. इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए अब देश के कई किसान परंपरागत फसलों को छोड़कर एवोकाडो की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस विदेशी फल की खेती से किसानों को हो रहे फायदे का जिक्र किया.

पीएम मोदी ने दिया आंध्र प्रदेश के किसान का उदाहरण

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के एक छोटे किसान वरदराज जी की सफलता की कहानी देश के सामने रखी. वरदराज पहले अपने खेतों में पारंपरिक रूप से टमाटर और केला उगाते थे, जिससे उन्हें ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा था. इसके बाद उन्होंने यूट्यूब YouTube और अन्य माध्यमों से जानकारी जुटाकर अपने छोटे से फार्म पर एवोकाडो की खेती शुरू की.

वैज्ञानिक सलाह और डायरेक्ट मार्केटिंग की बदौलत वरदराज जी अब तक करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं. आज वे किसी बिचौलिए के बिना सीधे स्थानीय दुकानों तक अपने फल पहुंचा रहे हैं, जिससे उनकी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा पीएम ने कर्नाटक के चिक्कमगलुरु के किसानों की भी तारीफ की, जो कॉफी के बागानों के बीच में सह-फसल Intercropping के रूप में एवोकाडो उगाकर अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं.

कहां-कहां हो सकती है खेती

एवोकाडो मूल रूप से दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का पौधा है, इसलिए इसे उगाने के लिए गर्म और नमी वाली जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. भारत में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों के अलावा हरियाणा और पंजाब के ऊपरी इलाकों में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है. इसके पौधों के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है, जिसमें पानी का सही निकास हो सके.

कितना हो सकता है मुनाफा

एवोकाडो की खेती को मुनाफे का सौदा माना जाने की सबसे बड़ी वजह इसकी ऊंची बाजार कीमत है. एक अच्छी तरह विकसित पेड़ से हर साल औसतन 200 से 500 फल तक मिल सकते हैं, जबकि 10 से 12 साल पुराने पेड़ों से और भी ज्यादा उत्पादन मिलने लगता है. महानगरों में इसकी गुणवत्ता के हिसाब से कीमत करीब 200 से 500 रुपये प्रति किलो तक होती है, जो आम फलों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है.

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किसानों के लिए क्यों है फायदेमंद विकल्प

परंपरागत फसलों में जहां किसानों को हर मौसम में जुताई, बुआई और कटाई का पूरा चक्र दोहराना पड़ता है, वहीं एवोकाडो जैसे फलदार पेड़ एक बार लग जाने के बाद सालों तक उत्पादन देते रहते हैं. इससे किसानों को बार-बार पूंजी लगाने की जरूरत कम पड़ती है. यही वजह है कि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों के किसान अब इसे एक स्थायी और मुनाफे वाली फसल के तौर पर अपना रहे हैं, और सरकार भी इस तरह के प्रयोगों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.

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