आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब खाने की बात आती है. तो लोग ज्यादातर हेल्दी खाना ही पसंद करते हैं. लेकिन जब बाजार से सब्जियां खरीदने की बात आती है तो इसमें कंप्रोमाइज हो जाता है. क्योंकि बाजार में मिलने वाली ज्यादातर सब्जियां केमिकल वाली होती है. ऐसे में अगर आप केमिकल फ्री ऑर्गेनिक सब्जियों खाना चाहते हैं. तो फिर घर पर ही सब्जियां उगा सकते हैं आजकल बहुत से लोग इस काम को कर रहे हैं. सर्दी आने वाली है और सर्दियों में फूलगोभी काफी पसंद की जाती है.
आप चाहे तो अपने घर पर फूलगोभी उगा सकते हैं वह भी बिल्कुल केमिकल फ्री. इसके लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं होगी. बस कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और आसान से गार्डनिंग टिप्स अपनाने होंगे. और इसके बाद कुछ ही समय में आप देखेंगे कि आपके किचन गार्डन में बढ़िया ताजी फूल गोभी नजर आ रही है. जो कि बाजार से मिलने वाली फूलगोभी से काफी बेहतर और हेल्दी होगी. चलिए आपको बताते हैं फूलगोभी क्यों होती है इतनी हेल्दी और कैसे उसे आप अपने घर के किचन गार्डन में उगा सकते हैं.
फूलगोभी में सेहत के लिए यह चीजें
आप अपने घर पर जो फूलगोभी उगते हैं वह सिर्फ एक बढ़िया सब्जी ही नहीं होती. बल्कि उसके अंदर न्यूट्रिशन और एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं. फूलगोभी में मौजूद ग्लूकोसिनोलेट्स जैसे कंपाउंड्स शरीर की सेल्स को डैमेज होने से बचाकर कैंसर जैसी घातक बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं. वहीं अगर आप वजन घटाने की सोच रहे हैं तो कम कैलोरी और हाई डाइटरी फाइबर से भरपूर यह सब्जी आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखेगा और मेटाबॉलिज्म सुधारेगा.
पेट में गैस, अपच या कब्ज जैसी रोजमर्रा की दिक्कतों को दूर करने में इसका फाइबर बेहद असरदार है. बच्चों के तेज दिमाग और याददाश्त के लिए इसमें जरूरी पोषक तत्व कोलीन मौजूद होता है जो उनकी मेंटल ग्रोथ को बूस्ट करता है. इसके अलावा, विटामिन-सी इम्यूनिटी को बढ़ाता है. वहीं विटामिन-के और मैग्नीशियम हड्डियों को अंदर से मजबूती देते हैं. सल्फोराफेन आपके दिल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है. जिससे आपका ओवरऑल स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है.
ऐसे करें उगाने की तैयारी
किचन गार्डन के गमले में फूलगोभी उगाने के लिए सबसे पहले सही मौसम और सही मिट्टी होनी जरूरी है. वैसे तो यह ठंडे मौसम की फसल है जिसे जुलाई से फरवरी के बीच आसानी से बोया जा सकता है. लेकिन आजकल बढ़िया हाइब्रिड वैरायटीज अलग-अलग सीजन में भी बढ़िया रिजल्ट देती हैं. इसकी ग्रोथ के लिए 15°C से 25°C का टेंपरेचर सबसे बढ़िया माना जाता है.
मिट्टी तैयार करते समय 50% बलुई दोमट मिट्टी, 30% गोबर की पुरानी खाद और 20% कोकोपीट का मिक्स बनाएं. गमले का साइज कम से कम 10 से 12 इंच गहरा और चौड़ा होना चाहिए. जिसमें नीचे पानी निकासी के लिए प्रॉपर ड्रेनेज होल बने हों. शुरुआत में बीजों को सीडलिंग ट्रे में बोकर पौध तैयार करें. जब छोटे पौधे 3 से 4 हफ्तों में 4-5 पत्तियों वाले हो जाएं. तब उन्हें शाम के वक्त बड़े गमले में ट्रांसप्लांट करें ताकि पौधों को शॉक न लगे.
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पौधों की देखभाल के टिप्स
पौध लगाने के बाद गोभी के पौधे को रोजाना कम से कम 4 से 6 घंटे की सीधी धूप वाली जगह पर रखें. पानी देते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि मिट्टी में नमी तो बनी रहे पर गमले में जलभराव बिल्कुल न हो. हर 15 से 20 दिन में पौधों को पोषण देने के लिए लिक्विड मस्टर्ड केक फर्टिलाइजर जरूर डालें. कीटों और फंगस से पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से बचाने के लिए 10 दिन में एक बार नीम के तेल का हल्का स्प्रे करें.

जब गोभी का सफेद फूल बनना शुरू हो तो उसे चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए उसके बाहरी पत्तों को ऊपर से हल्का सा बांध दें जिससे फूल एकदम दूधिया सफेद और फ्रेश बना रहता है. बुवाई के करीब 60 से 90 दिनों के भीतर आपकी फ्रेश, केमिकल-फ्री गोभी काटने के लिए तैयार हो जाती है.
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