पथरीली जमीन पर चढ़ जाएगी हरी चादर, इन बातों का ध्यान रख करें खेती

पथरीली जमीन पर चढ़ जाएगी हरी चादर, इन बातों का ध्यान रख करें खेती


देश के कई हिस्सों में किसानों के पास पथरीली और बंजर जमीन होती है, जिस पर खेती करना मुश्किल माना जाता है. लेकिन सही तकनीक और थोड़ी मेहनत से इस तरह की जमीन को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, पथरीली जमीन में पानी रोकने की क्षमता कम होती है और मिट्टी में पोषक तत्वों की भी कमी रहती है. ऐसे में अगर किसान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें, तो इस जमीन पर भी हरी-भरी फसल उगाई जा सकती है.

मिट्टी की जांच है सबसे जरूरी कदम

पथरीली जमीन पर खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराना बेहद जरूरी है. मिट्टी जांच से यह पता चलता है कि जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है. इसके आधार पर ही खाद और उर्वरक की मात्रा तय की जानी चाहिए. इसके अलावा जमीन में मौजूद बड़े पत्थरों और चट्टानों को हटाना भी शुरुआती काम माना जाता है, ताकि जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके.

जैविक खाद से बढ़ेगी उर्वरा शक्ति

पथरीली जमीन में मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल सबसे कारगर तरीका माना जाता है. गोबर की खाद, कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट डालने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और पोषक तत्वों की मात्रा भी बढ़ती है. समय के साथ यह जमीन की संरचना को भी बेहतर बनाता है, जिससे फसलों की जड़ें आसानी से मिट्टी में फैल पाती हैं.

सही फसलों का चुनाव जरूरी

हर फसल पथरीली जमीन के लिए उपयुक्त नहीं होती. ऐसी जमीन पर उन्हीं फसलों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिन्हें कम पानी और कम उपजाऊ मिट्टी में भी उगाया जा सकता है. मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा और रागी के अलावा दलहनी फसलें जैसे मूंग, चना और अरहर पथरीली जमीन के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं. इसके अलावा औषधीय पौधे और कुछ फलदार पेड़ जैसे बेर, अनार और अमरूद भी ऐसी जमीन पर अच्छी पैदावार दे सकते हैं.

सिंचाई की व्यवस्था पर दें ध्यान

पथरीली जमीन में पानी जल्दी रिस जाता है, इसलिए सिंचाई की सही व्यवस्था करना जरूरी है. बूंद-बूंद सिंचाई यानी ड्रिप इरिगेशन इस तरह की जमीन के लिए सबसे उपयुक्त तरीका माना जाता है. इससे पानी की बर्बादी भी कम होती है और पौधों की जड़ों तक सीधे नमी पहुंचती है. इसके अलावा मल्चिंग तकनीक अपनाने से भी मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है.

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टेरेस फार्मिंग बन सकती है कारगर विकल्प

अगर जमीन ढलान वाली और पथरीली है, तो टेरेस फार्मिंग यानी सीढ़ीनुमा खेती एक कारगर तरीका साबित हो सकती है. इस तकनीक से मिट्टी का कटाव रुकता है और बारिश का पानी भी जमीन में ठहरता है. पहाड़ी और ढलान वाले इलाकों में किसान इस पद्धति को अपनाकर अच्छी पैदावार हासिल कर रहे हैं.

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