सहजन की खेती बनी कमाई का नया जरिया, ऐसे करें शुरुआत

सहजन की खेती बनी कमाई का नया जरिया, ऐसे करें शुरुआत


अगर आपके पास खेती में लगाने के लिए लागत ज्यादा नहीं है और पानी की व्यवस्था भी काफी कम है. लेकिन आप कमाई अच्छी चाहते हैं. तो कौनसी ऐसी फसल है जो आपके काम आ सकती है. तो आपको बता दें इसके लिए सहजन यानी ड्रमस्टिक की खेती आपके लिए एक बढ़िया ऑप्शन साबित हो सकती है. पारंपरिक अनाजों के गिरते मार्जिन और मौसम की मार से परेशान किसान अब बागवानी की इस फसल की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं. मानसून और उसके ठीक बाद का समय सहजन के पौधे लगाने के लिए सबसे सही माना जाता है. 

क्योंकि इस दौरान मिट्टी में अच्छी नमी रहने से जड़ें बहुत तेजी से पकड़ बनाती हैं. सहजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बंजर, हल्की पथरीली या कम उपजाऊ जमीन पर भी आसानी से लहलहा जाता है. इसे न तो ज्यादा खाद-पानी की दरकार होती है और न ही रोज-रोज देखभाल का झंझट. इसके फल, फूल और पत्ते तीनों ही बाजार में महंगे बिकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि किसान सही प्लानिंग और तकनीक के साथ सहजन की खेती की शुरुआत कैसे कर सकते हैं.

ऐसे शुरू करें सहजन की खेती

सहजन की खेती के लिए सबसे पहले आपको सही किस्म के बीजों का चयन करना. अगर आप बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं तो ओडीसी 3, पीकेएम-1 और पीकेएम-2 जैसी हाइब्रिड किस्में लगा सकते हैं. यह इसके लिए सबसे बेहतरीन मानी जाती हैं. यह किस्में रोपाई के महज 7 से 8 महीने के भीतर फलियां देना शुरू कर देती हैं. खेत तैयार करते समय 10 गुणा 10 फीट की दूरी पर 2 गुणा 2 फीट के गड्ढे खोद लें. 

इन गड्ढों में 10 से 15 दिन धूप लगने दें जिससे मिट्टी के हानिकारक कीट खत्म हो जाएं. इसके बाद गड्ढों को सड़ी हुई गोबर की खाद, रेत और वर्मीकम्पोस्ट के मिश्रण से भर दें. एक एकड़ में लगभग 400 से 450 पौधे आसानी से लग जाते हैं. जब पौधा करीब ढाई से तीन फीट का हो जाए तो ऊपर से उसकी टिप को काट दें. इस छंटाई से पौधे में कई नई शाखाएं निकलती हैं और पेड़ झाड़ीनुमा हो जाता है जिससे ज्यादा फलियां आती हैं.

देखभाल और रखरखाव के टिप्स

सहजन की खेती की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें दूसरी फसलों की तरह रोजाना परेशान नहीं होना होता. इसे मवेशी और आवारा जानवर नहीं खाते इसलिए बाड़ लगाने का भारी-भरकम खर्च अपने आप बच जाता है. पानी की बात करें तो सहजन को बहुत ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती. ड्रिप सिस्टम लगाकर बहुत कम पानी में भी इसका शानदार उत्पादन लिया जा सकता है. 

सर्दियों और गर्मियों में 10 से 15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई काफी रहती है. जहां तक कीट और रोगों का सवाल है तो सहजन में बहुत कम बीमारियां लगती हैं. शुरुआत में कभी-कभार कैटरपिलर या फली छेदक कीट दिखें तो नीम का तेल या कोई और ऑर्गेनिक कीटनाशक छिड़कने से काम हो जाता है. कुल मिलाकर एक बार शुरुआती सेटअप तैयार हो गया. तो अगले कई सालों तक किसान को इसमें बहुत ज्यादा लागत लगाने की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ती.

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लाखों का हो सकता है मुनाफा

सहजन एक ऐसा पेड़ है जिसका हर पार्ट बिकता है और किसान को अलग-अलग तरीको से आमदनी देता है. एक स्वस्थ पेड़ से साल में दो बार फलियां मिलती हैं. जिससे औसतन 40 से 50 किलो सहजन आसानी से उतर आता है. अगर औसत थोक भाव 40 से 50 रुपये प्रति किलो भी मान लें. तो एक एकड़ से सालभर में 3 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की फलियां बिक जाती हैं. 

फलियों के अलावा दक्षिण भारत और विदेशों में मोरिंगा की सूखी पत्तियों के पाउडर की जबरदस्त डिमांड है. जो न्यूट्रिशन सप्लीमेंट के तौर पर 500 से 1000 रुपये किलो तक बिकता है. इसके फूलों की भी सब्जी के तौर पर अच्छी मांग रहती है. इतना ही नहीं शुरुआत के पहले दो साल तक किसान पौधों के बीच की खाली जमीन में दालें या हरी सब्जियां लगाकर एक्सट्रा मुनाफा भी कमा सकते हैं. 

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