पुरानी मशीन पर भी सब्सिडी मिलती है या सिर्फ नई खरीद पर? जानें नियम

पुरानी मशीन पर भी सब्सिडी मिलती है या सिर्फ नई खरीद पर? जानें नियम


किसानों व छोटे व्यापारियों को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार कई तरह की सब्सिडी स्कीम्स चलाती हैं. जब भी कोई नया बिजनेस शुरू करने या खेती का आधुनिकीकरण करने की बात आती है, तो मशीनों की खरीद पर मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता एक बड़ा सहारा बनती है. लेकिन बिजनेस शुरू करने वाले युवाओं, छोटे उद्यमियों और किसान भाइयों के मन में अक्सर एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या सरकारी सब्सिडी का लाभ केवल बिल्कुल नई मशीनें खरीदने पर ही मिलता है? आइए आज के इस आर्टिकल में हम इस भ्रम को दूर करते हैं और सरकारी नियमों को बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं.

सिर्फ नई मशीनों की खरीद पर ही क्यों मिलती है सब्सिडी?

सरकारी नीतियों का मुख्य उद्देश्य देश के उद्योगों को आधुनिक बनाना, पर्यावरण को सुरक्षित रखना और उत्पादकता को बढ़ाना होता है. यही वजह है कि लगभग 90 से 95 फीसदी सरकारी योजनाओं में सब्सिडी का लाभ केवल नई मशीनों की खरीद पर ही दिया जाता है. सरकार चाहती है कि देश के उद्योग और कृषि क्षेत्र में नई से नई तकनीक का इस्तेमाल हो. पुरानी मशीनें अक्सर पुरानी तकनीक पर काम करती हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और गति दोनों प्रभावित होती हैं.

ऊर्जा और पर्यावरण भी एक बड़ा कारण

नई मशीनें कम बिजली खाती हैं और उनसे प्रदूषण भी कम होता है. सरकार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली पुरानी और पुरानी पड़ चुकीं डीजल या भारी बिजली खपत वाली मशीनों को बढ़ावा नहीं देना चाहती. इसके अलावा पुरानी मशीनों की वास्तविक कीमत का सटीक अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल होता है. ऐसे में कई बार बिलों में हेरफेर या धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है. नई मशीनों का बकायदा मैन्युफैक्चरर बिल, जीएसटी इनवॉइस और सीरियल नंबर होता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है.

क्या पुरानी ट्रैक्टर-कल्टीवेटर पर मिलेगी सब्सिडी?

कृषि विभाग के नियमानुसार पुरानी या सेकंड हैंड कृषि मशीनों पर किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी नहीं दी जाती है. किसान भाइयों को सब्सिडी का लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा पंजीकृत डीलरों से ही नई मशीनें खरीदनी होती हैं और उनका वैलिड इनवॉइस व जीपीएस लोकेशन के साथ वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य होता है. 

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क्या है पुरानी मशीनों का अपवाद?

छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए सरकार की कुछ चुनिंदा लोन लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम्स जैसे CLCSS में मुख्य रूप से नई और आधुनिक मशीनों को ही शामिल किया जाता है. ऐसी योजनाओं में खासतौर पर सरकार और बैंक बेहद कड़े नियम लागू करते हैं. इसके लिए एक अधिकृत चार्टर्ड इंजीनियर से मशीन की बची हुई उम्र , उसकी कार्यक्षमता और उसकी सही कीमत का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है. इसके बिना पुरानी मशीन पर किसी भी तरह की राहत या लोन सब्सिडी मिलना असंभव है.

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