- जमीन किसान के नाम हो नौकरीपेशा व्यक्ति अपात्र माने जाएंगे.
देश में करोड़ों की संख्या में किसान रहते हैं. इन किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जाती हैं. जिनमें पीएम किसान सम्मान निधि योजना सबसे बड़ी योजना में शामिल है. देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों के लिए इस योजना के जरिए हर चार महीने पर 2000 रुपये की किस्त के जरिए सालाना 6000 रुपये दिए जाते हैं. जो कि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचते हैं. लेकिन अगर आप अब तक इस योजना से नहीं जुड़े हैं और पहली बार आवेदन करने का मन बना रहे हैं. तो जरा ठहर जाएं.
अब बिहार में इस योजना के आवेदन का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. सरकार ने फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने और अपात्र लोगों को बाहर करने के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया है. अगर आप बिना तैयारी के फॉर्म भरने बैठेंगे तो आपका फार्म पहले ही खारिज हो सकता है. इसलिए आवेदन करने से पहले एक बेहद अहम सरकारी दस्तावेज तैयार करवाना जरूरी हो गया है. चलिए आपको बताते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
नए आवेदकों के लिए जरूरी हुई फार्मर आईडी
अगर आप बिहार के किसान हैं और पीएम किसान योजना में पहली बार नया रजिस्ट्रेशन कराने जा रहे हैं. तो सबसे पहले आपको अपनी फार्मर आईडी यानी किसान रजिस्ट्री बनवानी होगी. कृषि विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि नए आवेदकों के लिए यह डिजिटल पहचान पत्र अब पूरी तरह जरूरी है.
हालांकि जो पुराने लाभार्थी किसान हैं यानी जिन्हें पहले से लगातार सम्मान निधि की किस्तें मिल रही हैं उन्हें फिलहाल बिना फार्मर आईडी भी किस्त मिलती रहेगी. लेकिन नए किसानों के लिए पोर्टल पर फार्मर आईडी दर्ज किए बिना आवेदन प्रोसेस आगे ही नहीं बढ़ेगी.
बिहार समेत देश के तमाम राज्यों में डिजिटल फार्मर रजिस्ट्री का काम काफी तेजी से चल रहा है. इस आईडी में किसान की आधार संख्या, मोबाइल नंबर और उसकी अपनी कृषि योग्य जमीन का पूरा ब्योरा डिजिटल तौर पर दर्ज होता है. इसलिए नया फॉर्म भरने से पहले नजदीकी सीएससी सेंटर या राज्य के कृषि पोर्टल पर जाकर यह आईडी जरूर बनवा लें.
यह शर्ते भी जरूरी हैं
बहुत से किसानों को लगता है कि अगर उन्होंने किसी तरह फार्मर आईडी बनवा ली तो उन्हें खुद-ब-खुद पीएम किसान का लाभ मिलने लगेगा. लेकिन ऐसा नहीं है फार्मर आईडी होना योजना का लाभ पाने की एक अकेली शर्त नहीं है. योजना का पैसा सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो पीएम किसान की सभी गाइडलाइंस को पूरा करते हैं.सबसे जरूरी शर्त यह है कि जमीन सीधे किसान के अपने नाम पर दर्ज होनी चाहिए.
बिहार जैसे राज्यों में अक्सर देखा गया है कि जमीन आज भी दादा या परदादा के नाम पर चल रही है और पोते खेती कर रहे हैं. ऐसे में फार्मर आईडी और पीएम किसान दोनों में दिक्कत आ रही है. इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति नौकरीपेशा है, इनकम टैक्स भरता है या पेंशनर है. तो भले ही उसने जमीन दिखाकर फार्मर आईडी बनवा ली हो उसे सम्मान निधि की किस्त के लिए पूरी तरह अपात्र माना जाएगा.
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इन बातों का रखें खास ध्यान
जो किसान अपनी जमीन न होकर दूसरों के खेतों पर बटाई या पट्टे पर खेती करते हैं. उनके लिए भी सरकार अब अस्थायी फार्मर आईडी बनाने की प्लानिंग कर रही है. जिससे उन्हें खाद और बीज की योजनाओं में उन्हें लाभ मिलने में दिक्कत न हो. हालांकि पीएम किसान का सालाना आर्थिक लाभ मौजूदा नियमों के तहत केवल रजिस्टर्ड जमीन मालिकों को ही दिया जाता है.
अगर आप योग्य किसान हैं और योजना का लाभ चाहते हैं. तो फार्मर आईडी बनवाने के साथ-साथ अपने बैंक खाते को आधार से लिंक और बायोमेट्रिक या ओटीपी आधारित ई-केवाईसी जरूर समय पर पूरी रखें. सरकार अब खाद की बुकिंग से लेकर फसल बीमा और राहत मुआवजे तक सब कुछ इसी डिजिटल फार्मर आईडी से जोड़ रही है. अगर आप नए किसान हैं, तो बिना किसी देरी के अपनी फार्मर आईडी बनवा लें.
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