मथुरा से ओडिशा, केरल तक ऐसे मनाई जाती है जन्माष्टमी, हर जगह की परंपरा है अनोखी

मथुरा से ओडिशा, केरल तक ऐसे मनाई जाती है जन्माष्टमी, हर जगह की परंपरा है अनोखी


उत्तर प्रदेश – यूपी कान्हा की जन्म और कर्म भूमि रहा है. मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है. साल में इसी सिर्फ इस बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती होती है. मंदिरों में भगवान कृष्ण के जन्म की भव्य झांकियां सजाई जाती हैं. आधी रात को शंख-घंटियों के बीच कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है और बाल गोपाल का अभिषेक किया जाता है.

तमिलनाडु - यहां कई घरों में मुख्य द्वार से पूजा स्थल तक चावल के आटे या रंगोली से नन्हे-नन्हे पैरों के निशान बनाए जाते हैं. इन्हें इस भाव से सजाया जाता है कि मानो बाल गोपाल स्वयं घर में प्रवेश कर रहे हों.

तमिलनाडु – यहां कई घरों में मुख्य द्वार से पूजा स्थल तक चावल के आटे या रंगोली से नन्हे-नन्हे पैरों के निशान बनाए जाते हैं. इन्हें इस भाव से सजाया जाता है कि मानो बाल गोपाल स्वयं घर में प्रवेश कर रहे हों.

जगन्नाथ संस्कृति की परंपरा के अनुसार, जन्माष्टमी से एक दिन पहले भगवान को ‘जेउता भोग’ अर्पित किया जाता है। इसी क्रम में ‘कृष्ण जन्म नीति’ से जुड़ी विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं। मान्यता है कि यह भोग प्रसव पीड़ा को कम करने में सहायक होता है. इस परंपरा में भगवान जगन्नाथ स्वंय श्रीकृष्ण की जन्मदात्री माता बनते हैं. इस परंपरा के दौरान मंदिर दर्शन के लिए बंद रहता है.

जगन्नाथ संस्कृति की परंपरा के अनुसार, जन्माष्टमी से एक दिन पहले भगवान को ‘जेउता भोग’ अर्पित किया जाता है। इसी क्रम में ‘कृष्ण जन्म नीति’ से जुड़ी विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं। मान्यता है कि यह भोग प्रसव पीड़ा को कम करने में सहायक होता है. इस परंपरा में भगवान जगन्नाथ स्वंय श्रीकृष्ण की जन्मदात्री माता बनते हैं. इस परंपरा के दौरान मंदिर दर्शन के लिए बंद रहता है.

महाराष्ट्र- महाराष्ट्र में जन्माष्टमी को गोविंदा उत्सव के रूप में मनाते हैं. दही और मक्खन से भरी मटकी ऊंचाई पर लटकाई जाती है, जिसे मानव पिरामिड बनाकर फोड़ा जाता है.

महाराष्ट्र- महाराष्ट्र में जन्माष्टमी को गोविंदा उत्सव के रूप में मनाते हैं. दही और मक्खन से भरी मटकी ऊंचाई पर लटकाई जाती है, जिसे मानव पिरामिड बनाकर फोड़ा जाता है.

गुजरात - द्वारका में जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है. यहां भगवान कृष्ण को एक राजा, रक्षक के रूप में पूजा जाता है. इन्हीं वजहों से द्वारका में जन्माष्टमी का अवसर बाकि राज्यों की तुलना में अलग होता है.

गुजरात – द्वारका में जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है. यहां भगवान कृष्ण को एक राजा, रक्षक के रूप में पूजा जाता है. इन्हीं वजहों से द्वारका में जन्माष्टमी का अवसर बाकि राज्यों की तुलना में अलग होता है.

केरल - केरल में कृष्ण जन्माष्टमी को ‘अष्टमी रोहिणी’ के नाम से जाना जाता है.इस मौके पर बच्चे कृष्ण और उनसे जुड़े अन्य पात्रों भेष बनाते हैं. कई स्थानों पर जुलूस निकाले जाते हैं और उरियाडी यानी मटकी फोड़ने की रस्म निभाई जाती है.

केरल – केरल में कृष्ण जन्माष्टमी को ‘अष्टमी रोहिणी’ के नाम से जाना जाता है.इस मौके पर बच्चे कृष्ण और उनसे जुड़े अन्य पात्रों भेष बनाते हैं. कई स्थानों पर जुलूस निकाले जाते हैं और उरियाडी यानी मटकी फोड़ने की रस्म निभाई जाती है.

Published at : 04 Sep 2026 02:07 PM (IST)

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