किसानों को लखपति बना देगा ये Pusa बासमती 3136, कैसे करते हैं इसकी खेती?

किसानों को लखपति बना देगा ये Pusa बासमती 3136, कैसे करते हैं इसकी खेती?


पारंपरिक बासमती की खेती में सबसे बड़ा डर बीमारियों का रहता है. जिसकी वजह से किसानों की आधी कमाई पेस्टिसाइड्स में चली जाती है. लेकिन 3136 वैरायटी में शीथ ब्लाइट और बैक्टीरियल ब्लाइट जैसी जानलेवा बीमारियों से लड़ने की इनबिल्ट ताकत है. यानी फसल पर कीड़ों का अटैक बहुत कम होगा और दवाइयों का भारी-भरकम खर्च सीधे आपकी जेब में बचेगा.

इसकी नर्सरी तैयार करने का सबसे सही समय मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जून के पहले पखवाड़े तक माना जाता है. नर्सरी डालते वक्त बीजों को अच्छी तरह ट्रीट करना न भूलें. जिससे शुरुआत से ही पौधे मजबूत निकलें. जब पौध लगभग 20 से 25 दिन की हो जाए तब खेत में रोपाई के लिए बिल्कुल तैयार समझिए.

इसकी नर्सरी तैयार करने का सबसे सही समय मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जून के पहले पखवाड़े तक माना जाता है. नर्सरी डालते वक्त बीजों को अच्छी तरह ट्रीट करना न भूलें. जिससे शुरुआत से ही पौधे मजबूत निकलें. जब पौध लगभग 20 से 25 दिन की हो जाए तब खेत में रोपाई के लिए बिल्कुल तैयार समझिए.

खेत की तैयारी करते समय दोमट मिट्टी वाले खेतों में लेजर लैंड लेवलिंग जरूर करा लें. जिससे कि पानी का फैलाव एक जैसा रहे. प्रति एकड़ करीब 5 से 6 किलो बीज की जरूरत पड़ती है. रोपाई करते वक्त कतार से कतार और पौधे से पौधे के बीच सही दूरी रखना बेहद जरूरी है.

खेत की तैयारी करते समय दोमट मिट्टी वाले खेतों में लेजर लैंड लेवलिंग जरूर करा लें. जिससे कि पानी का फैलाव एक जैसा रहे. प्रति एकड़ करीब 5 से 6 किलो बीज की जरूरत पड़ती है. रोपाई करते वक्त कतार से कतार और पौधे से पौधे के बीच सही दूरी रखना बेहद जरूरी है.

पोषण प्रबंधन के मामले में यह किस्म काफी कम डिमांड रखती है. खेत में यूरिया का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से बचें. क्योंकि इससे पौधे अनचाहे लंबे हो जाते हैं. रोपाई के समय डीएपी, पोटाश और जिंक की सही डोज दें. नाइट्रोजन को दो से तीन बार में स्प्लिट करके खेत में डालें. जिससे पौधों को धीरे-धीरे ताकत मिलती रहे.

पोषण प्रबंधन के मामले में यह किस्म काफी कम डिमांड रखती है. खेत में यूरिया का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से बचें. क्योंकि इससे पौधे अनचाहे लंबे हो जाते हैं. रोपाई के समय डीएपी, पोटाश और जिंक की सही डोज दें. नाइट्रोजन को दो से तीन बार में स्प्लिट करके खेत में डालें. जिससे पौधों को धीरे-धीरे ताकत मिलती रहे.

पानी देने के मामले में भी यह किस्म किसानों को काफी राहत देती है. हर वक्त खेत को लबालब भरने की बजाय मिट्टी में नमी बनाए रखना ही काफी होता है. कल्ले फूटने के दौरान और बालियां निकलते समय खेत में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें. क्योंकि यही वह समय है जो फाइनल पैदावार तय करती है.

पानी देने के मामले में भी यह किस्म किसानों को काफी राहत देती है. हर वक्त खेत को लबालब भरने की बजाय मिट्टी में नमी बनाए रखना ही काफी होता है. कल्ले फूटने के दौरान और बालियां निकलते समय खेत में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें. क्योंकि यही वह समय है जो फाइनल पैदावार तय करती है.

रोपाई के लगभग 135 से 140 दिनों के भीतर यह फसल पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है. इसके पौधे मजबूत तने वाले होते हैं. जिस वजह से तेज हवा या हल्की बारिश में फसल के खेत में गिरने का खतरा न के बराबर रहता है. गिरने से बचाव होने की वजह से दानों का नुकसान पूरी तरह बच जाता है.

रोपाई के लगभग 135 से 140 दिनों के भीतर यह फसल पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है. इसके पौधे मजबूत तने वाले होते हैं. जिस वजह से तेज हवा या हल्की बारिश में फसल के खेत में गिरने का खतरा न के बराबर रहता है. गिरने से बचाव होने की वजह से दानों का नुकसान पूरी तरह बच जाता है.

कटाई के समय जब बालियों के दाने सुनहरे-भूरे रंग के होने लगें और उनमें नमी करीब 18 से 20 परसेंट रह जाए. तब हार्वेस्टिंग शुरू कर दें. इसके पके हुए लंबे और चमकदार दानों की क्वालिटी एक्सपोर्ट लेवल की होती है. यही वजह है कि जब यह धान मंडी में पहुंचता है. तो मिलर्स इसे हाथों-हाथ खरीदते हैं.

कटाई के समय जब बालियों के दाने सुनहरे-भूरे रंग के होने लगें और उनमें नमी करीब 18 से 20 परसेंट रह जाए. तब हार्वेस्टिंग शुरू कर दें. इसके पके हुए लंबे और चमकदार दानों की क्वालिटी एक्सपोर्ट लेवल की होती है. यही वजह है कि जब यह धान मंडी में पहुंचता है. तो मिलर्स इसे हाथों-हाथ खरीदते हैं.

प्रति एकड़ एवरेज 25 से 28 क्विंटल की बंपर पैदावार और मंडियों में मिलने वाला बासमती के बढ़िया रेट किसानों को लखपति बना देता है. कम लागतमें सुरक्षित फसल और इसकी मार्केट में काफी डिमांड के चलते यह किस्म आज के वक्त में किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है.

प्रति एकड़ एवरेज 25 से 28 क्विंटल की बंपर पैदावार और मंडियों में मिलने वाला बासमती के बढ़िया रेट किसानों को लखपति बना देता है. कम लागतमें सुरक्षित फसल और इसकी मार्केट में काफी डिमांड के चलते यह किस्म आज के वक्त में किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है.

Published at : 04 Sep 2026 02:53 PM (IST)

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