किसानों को पारंपरिक खेती में हर सीजन सिर्फ लागत निकालने की फिक्र रहती है. अगर आप भी खेती में इसी डर का सामना करते हैं कि मुनाफा लागत निकाल पाएगा या नहीं तो फिर आपको अपनी सोच और फसल दोनों को बदलने का वक्त आ गया है. आजकल बागवानी फसलें किसानों को खूब फायदा दिलवा रही है. इनमें अनार की खेती से मुनाफा काफी ज्यादा हो रहा है. क्योंकि अनार का बगीचा कम पानी, सूखी जमीन और तेज धूप में भी अच्छी पैदावार देने का दम रखता है.
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार पौधा लगाने के बाद यह आपको लगातार 20 से 25 साल तक बंपर कमाई का मौका देता है. बाजार में अनार की मांग 12 महीने बनी रहती है चाहे वह बड़े शहरों के सुपरमार्केट्स हों या जूस के लोकल शाॅप्स. अगर आप सही तकनीक, उन्नत किस्म और संतुलित प्रबंधन के साथ महज एक एकड़ में भी अनार की बागवानी शुरू करते हैं. तो यह घाटे की खेती को लाखों रुपये के पक्के सालाना बिजनेस में बदल सकता है. जान लीजिए एक एकड़ में कमाई का पूरा हिसाब-किताब.
इतनी आएगी पहले साल की लागत
एक एकड़ में अनार का बगीचा लगाने के लिए सबसे पहले मिट्टी की जांच और खेत की गहरी जुताई जरूरी होती है. अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे सही मानी जाती है. किस्मों की बात करें तो भगवा या सिंदूरी अनार की मांग बाजार में सबसे ज्यादा रहती है. क्योंकि इसके दाने गहरे लाल, रसीले और बेहद मीठे होते हैं. एक एकड़ में लगभग 300 से 400 पौधे 10×14 या 12×12 फीट की दूरी पर लगाए जाते हैं.
ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, हाई क्वालिटी वाले ग्राफ्टेड पौधे, गड्ढे की तैयारी, गोबर की सड़ी खाद और शुरुआती सेफ्टी घेरा मिलाकर पहले साल करीब 1.5 से 2 लाख रुपये का खर्च बैठता है. केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत ड्रिप और पौधों पर 40 से 50 फीसदी तक सब्सिडी भी देती हैं. जिससे आपकी जेब का खर्च थोड़ा कम हो जाता है.
तीसरे साल से फलों की शुरुआत
अनार का पौधा रोपाई के बाद तीसरे साल से फल देना शुरू करता है. शुरुआती दो साल पौधों की सही कटाई-छंटाई यानी प्रूनिंग पर पूरा ध्यान देना होता है, जिससे तना मजबूत बने और शाखाओं का स्ट्रक्चर सही रहे. तीसरे साल में एक पौधा औसतन 15 से 20 किलो फल आसानी से दे देता है. इस हिसाब से तीसरे साल एक एकड़ से करीब 6 से 8 टन अनार की पहली पैदावार हासिल हो जाती है.
जैसे-जैसे पौधे की उम्र पांचवें साल तक पहुंचती है, एक ही पेड़ 30 से 40 किलो तक फल देने लगता है. पूरे साल में पानी का सही संतुलन बनाए रखना जरूरी है. क्योंकि सही सिंचाई नहीं हुई तो फल फटने की दिक्कत आ सकती है. इसके अलावा फल मक्खी और फफूंद से बचाव के लिए ऑर्गेनिक नीम तेल और बोर्डो मिश्रण का सही समय पर छिड़काव करने से फलों का रंग और चमक दोनों चमकदार बने रहते हैं.
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इतना हो सकता है कुल मुनाफा
एक एकड़ में अनार की खेती से किसान कुल कितना मुनाफा कमा पाएंगे. इसका हिसाब-किताब समझने के लिए आपको बस कुल कमाई में से खर्चे को निकाल देना है. इसे ऐसे जानते हैं पांचवें साल के बाद एक एकड़ बाग से औसतन 12 से 15 टन अनार का उत्पादन आराम से मिल जाता है. अगर बाजार में औसत थोक भाव 80 से 100 रुपये प्रति किलो भी मिले तो कुल सालाना बिक्री 10 से 12 लाख रुपये के बीच बैठती है.

अगर आप खाद, दवा, पानी, लेबर और तुड़ाई का सालाना मेंटेनेंस खर्च 2 से 2.5 लाख रुपये निकाल भी दें. तो हर साल 7 से 9 लाख रुपये का मुनाफा सीधा बचता है. अगर फलों की ग्रेडिंग खुद करके प्रीमियम क्वालिटी सीधे बड़ी मंडियों या एक्सपोर्टर्स को बेची जाए. तो यह मुनाफा 12 लाख रुपये सालाना से भी पार निकल सकता है.
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