Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर घर में बप्पा की स्थापना केवल मूर्ति रखने की प्रक्रिया नहीं है. परंपरागत पूजा-विधि में पहले पूजा स्थान की शुद्धि, आसन, कलश पूजन, संकल्प और इसके बाद गणपति का आवाहन एवं पूजन किया जाता है. कलश को पूजा में देवताओं और पवित्र नदियों के आवाहन का आधार माना गया है. इसलिए गणेश स्थापना के समय कलश की तैयारी भी विधि का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
कलश में क्या रखें?
- गणेश स्थापना के लिए साफ तांबे, पीतल या अन्य शुद्ध पात्र का कलश लें. उसमें शुद्ध जल भरें.
- इसमें अक्षत, सुपारी, दूर्वा और एक सिक्का रखा जा सकता है.
- कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उनके ऊपर नारियल स्थापित करें.
- नारियल को लाल वस्त्र या मौली से बांधकर रखें.
गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना कैसे करें?
पूजा स्थान तैयार करें – सबसे पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें. चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र बिछाएं. मूर्ति स्थापना के लिए चावल या अक्षत की छोटी-सी वेदी बनाई जा सकती है.
कलश स्थापित करें- चौकी के पास कलश रखें. कलश का पूजन गंध, अक्षत और पुष्प से करें. इसके बाद उसमें देवताओं एवं पवित्र नदियों का आवाहन करने की परंपरा है.
संकल्प लें – आचमन के बाद देश-काल का स्मरण करते हुए परिवार के कल्याण और गणपति पूजन का संकल्प लें. परंपरागत गणेश चतुर्थी पूजा-विधि में संकल्प के बाद पूजन की अन्य तैयारियां और फिर गणपति की प्राणप्रतिष्ठा बताई गई है.
गणपति की मूर्ति स्थापित करें – बप्पा की मूर्ति को स्वच्छ चौकी पर अक्षत के ऊपर स्थापित करें. मूर्ति को स्थापित करते समय गणपति का आवाहन करें. वैदिक परंपरा में गणपति स्थापना के लिए गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥ ये ऋग्वेद का मंत्र है
प्राणप्रतिष्ठा और पूजन – फिर आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य आदि उपचारों से पूजा की जाती है.
दूर्वा और मोदक अर्पित करें – गणेश जी को दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक अथवा अन्य नैवेद्य अर्पित करें. दूर्वा हमेशा जोड़े से चढ़ाएं. फिर गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें.
आरती करें – गणेश जी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य भगवान से बुद्धि, विवेक और मंगल की प्रार्थना करें.
स्थापना में इन बातों का रखें ध्यान
- गणेश स्थापना के लिए स्थानीय पंचांग में दिए मध्याह्न मुहूर्त को तवज्जों दी जाती है. स्थापना के समय क्लेश न करें.
- गणपति आने के बाद घर में साफ सफाई रखें.
- ब्रह्मचर्य का पालन करें, लहसुन-प्याज से युक्त खाना न खाएं.
- ध्यान रखें कलश में रखी सामग्री विसर्जन के दौरान विसर्जित करें, इधर उधर न फेंके, नहीं तो 10 दिन की पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है ऐसी मान्यता है.
गणेश स्थापना मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को हरतालिका तीज की सुबह पूजा का समय लगभग सुबह 6:03 से 8:27 बजे तक और गणेश चतुर्थी की मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक है. स्थापना के लिए ये शुभ मुहूर्त रहेगा.
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