- वेस्ट डीकंपोजर घोल फसल अवशेष गलाने, खाद बनाने में उपयोगी है.
- 60 लीटर ड्रम में 50 लीटर पानी, आधा किलो गुड़ और कल्चर मिलाएं.
- घोल रोज़ चलाकर छायादार जगह पर 5-7 दिन में तैयार करें.
- तैयार घोल का उपयोग सिंचाई, छिड़काव और खाद बनाने में करें.
खेती में खाद और कीटनाशक खरीदने के लिए किसानों का अलग खर्च करना होता है. बाजार से मिलने वाले केमिकल प्रोडक्ट महंगे होने के साथ मिट्टी की सेहत के लिए खराब होते हैं. इसी वजह से बहुत से किसान अब खेती में कम खर्च वाले तरीकों अपना रहे हैं. वेस्ट डीकंपोजर घोल भी ऐसा ही एक ऑप्शन है. इसे तैयार करने के लिए बहुत महंगे सामान की जरूरत नहीं पड़ती.
यह घोल खेत में पड़े फसल अवशेष को गलाने, कम्पोस्ट तैयार करने और मिट्टी में मौजूद ऑर्गेनिक मैटर को एक्टिव करने में मदद कर सकता है. किसान इसे अपने घर और खेत दोनों ही जगहों पर भी आसानी से तैयार कर सकते हैं. इसके लिए पानी, गुड़ और वेस्ट डीकंपोजर कल्चर की जरूरत पड़ेगी. चलिए आपको बताते हैं इसका पूरा प्रोसेस क्या है.
50 लीटर पानी में मिलाएं आधा किलो गुड़
घोल तैयार करने के लिए सबसे पहले करीब 60 लीटर कैपेसिटी वाला साफ प्लास्टिक ड्रम लें. इसमें 50 लीटर साफ पानी भरें. लोहे के ड्रम का इस्तेमाल करने से बचें. पानी में क्लोरीन की मात्रा ज्यादा हो तो उसे कुछ घंटे खुले बर्तन में रख दें. इसके बाद आधा किलो गुड़ को अलग बाल्टी में थोड़े पानी के साथ अच्छी तरह घोलें. गुड़ में मिट्टी और दूसरी गंदगी नहीं होनी चाहिए.
गुड़ वाला पानी छानकर बड़े ड्रम में डाल दें. इसके बाद इसमें वेस्ट डीकंपोजर कल्चर मिलाएं. 50 लीटर पानी के लिए कल्चर की सही मात्रा उसके पैकेट पर लिखे निर्देश के हिसाब से रखें. सभी चीजों को लकड़ी के साफ डंडे से अच्छी तरह मिलाएं. ड्रम के ऊपर साफ सूती कपड़ा बांध दें. इसे एयरटाइट बंद न करें. ड्रम को छायादार और हल्की गर्म जगह पर रखें. तेज धूप सीधे पड़ने पर कल्चर की एक्टिविटी प्रभावित हो सकती है. इसके आसपास सफाई बनाए रखना भी जरूरी है.
सुबह शाम अच्छी तरह चलाएं तैयार मिक्सचर
ड्रम में सभी चीजें मिलाने के बाद घोल को ऐसे ही मत छोड़ दे. इसे रोज सुबह और शाम लकड़ी के साफ डंडे से कुछ मिनट तक चलाएं. इससे घोल के अंदर हवा पहुंचेगी और मौजूद माइक्रोब्स एक्टिव होंगे. गर्म मौसम में घोल करीब पांच से सात दिनों में तैयार हो सकता है. ठंड के दौरान इसे तैयार होने में ज्यादा समय लग सकता है. रंग में बदलाव और ऊपर दिखने वाली हल्की परत से एक्टिविटी का अंदाजा लगाया जा सकता है.
घोल से बहुत तेज सड़ी हुई बदबू आए और रंग असामान्य दिखाई दे तो उसे सीधे फसल में इस्तेमाल न करें. पहले किसी कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें. ड्रम में केमिकल प्रोडक्ट और गंदा पानी न मिलाएं. तैयार घोल को जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा. पुराने घोल के कुछ हिस्से से अगली खेप भी तैयार की जा सकती है. इसके लिए दोबारा 50 लीटर पानी और आधा किलो गुड़ मिलाना होगा. ड्रम को पशुओं और छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें.
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तैयार घोल का खेत में ऐसे करें इस्तेमाल
वेस्ट डीकंपोजर घोल का इस्तेमाल कम्पोस्ट तैयार करने और खेत में पड़े फसल अवशेष को गलाने में किया जा सकता है. सूखे फसल अवशेष की एक परत बनाकर उस पर तैयार घोल का हल्का छिड़काव करें. ढेर में जरूरत के मुताबिक नमी बनाए रखें. कुछ दिनों के अंतर पर इसे पलटते रहें. इससे अवशेष के सभी हिस्सों तक हवा और घोल पहुंच सकेगा. तैयार घोल सिंचाई के पानी के साथ खेत में भी दिया जा सकता है.

फसल की पत्तियों पर स्प्रे करने से पहले घोल को साफ कपड़े से अच्छी तरह छान लें. बिना छाने हुए घोल से स्प्रे मशीन का नोजल बंद हो सकता है. इसे आप पहली बार में ही पूरे खेत में मत डाल दें बल्कि पहले इसे खेते के एक छोटे हिस्से पर टेस्ट करें. इसके बाद पौधों पर असर देखें. पूरे खेत में इसका इस्तेमाल करने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें.
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