हिमाचल के स्कूलों में बदलेगा यूनिफॉर्म का रंग, टीचर्स के लिए भी नया ड्रेस कोड 

हिमाचल के स्कूलों में बदलेगा यूनिफॉर्म का रंग, टीचर्स के लिए भी नया ड्रेस कोड 


हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों के पहनावे के साथ-साथ स्कूलों की बिल्डिंग का रंग भी एक तय पैटर्न के अनुसार होगा. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के बैठक हुई. जिसमें सीबीएसई स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म, शिक्षकों की ड्रेस कोड और बिल्डिंग की कलर स्कीम को अंतिम रूप देने को लेकर फैसला लिया गया. सरकार का कहना है कि इन बदलाव के लिए जरिए स्कूलों को एक अलग और एक रूप पहचान देने के साथ छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा. 

छात्रों के लिए ग्रीन कलर की यूनिफॉर्म 

बैठक में बताया गया कि हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में छात्रों की यूनिफॉर्म ग्रीन कलर स्कीम पर आधारित होगी. यानी राज्य के इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एक अलग और तय ड्रेस पैटर्न रखा जाएगा. इसके साथ स्कूलों की बिल्डिंग के लिए भी एक समान रंग तय किया गया है. सीबीएसई स्कूलों के भवनों को ओलिव ग्रीन और सैंड बैज रंगों में पेंट किया जाएगा. इससे अलग-अलग स्कूलों के प्रेशर में एक समान रंग संयोजन नजर आएगा. 

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महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए भी अलग ड्रेस कोड 

छात्रों के साथ शिक्षकों के पहनावे को लेकर भी स्पष्ट ड्रेस कोड तय किया गया है. महिला शिक्षकों के लिए लाइट लिलैक पर्पल रंग की ड्रेस निर्धारित की गई है,  जबकि पुरुष शिक्षक लाइट ब्लू ट्राउजर और शर्ट पहनेंगे. सरकार ने शिक्षकों के ड्रेस कोड को साफ-सुथरा, फॉर्मल, शालीन और प्रोफेशनल रखने पर जोर दिया है. शिक्षकों को ड्यूटी के दौरान कम से कम एसेसरीज इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा स्कूल में ड्यूटी के समय शिक्षकों के लिए अपना आईडी कार्ड पहनना भी जरूरी होगा, ताकि उनकी पहचान आसानी से की जा सके. 

सीबीएसई स्कूलों के लिए 80 करोड रुपये जारी 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और बच्चों को उनके घर के नजदीक बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है. इसी दिशा में सीबीएसई स्कूलों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और छात्रों व शिक्षकों की सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार पहले ही 80 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है. इसके अलावा इन स्कूलों के लिए 5 करोड़ रुपये और जारी किए जाएंगे. सरकार के अनुसार इस राशि का इस्तेमाल शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को उनके घर के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में किया जाएगा.

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