- मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें, 90-120 दिन में तैयार.
आजकल लोग अपने घरों में खूब सब्जियां उगा रहे है. लोग अब बालकनी और छत की खाली जगह को छोटे किचन गार्डन में बदल रहे हैं. आमतौर पर गमले में टमाटर, मिर्च और धनिया लगाते है. लेकिन अगर सही तरकीब अपनाई जाए तो शकरकंद भी उगाया जा सकता है. इसकी बेल तेजी से फैलती है और जमीन के अंदर तैयार होने वाली जड़ को बढ़ने के लिए ठीक-ठाक जगह चाहिए होती है. इसी वजह से सही गमला चुनना बेहद जरूरी है.
शकरकंद को बीज की जगह इसकी बेल की कटिंग और अंकुर निकले हुए हिस्से से उगाया जाता है. पौधा लगाना आसान है लेकिन अच्छी उपज के लिए मिट्टी, धूप, पानी और गमले की गहराई का सही तालमेल बनाना होगा. बहुत भारी मिट्टी और ज्यादा नमी से शकरकंद का साइज प्रभावित हो सकता है. अगर आप पहली बार इसे गमले में लगाने की तैयारी कर रहे हैं तो सही तरीका जान लें.
बड़े गमले के साथ तैयार करें भुरभुरी मिट्टी
शकरकंद जमीन के अंदर बढ़ता है. इसलिए इसे लगाने के लिए कम से कम 18 से 24 इंच चौड़ा और करीब 15 से 18 इंच गहरा गमला चुनें. इसके लिए कपड़े वाला ग्रो बैग भी अच्छा ऑप्शन बन सकता है. गमले के नीचे पानी निकालने के लिए छेद जरूर होने चाहिए. मिट्टी को हल्का और भुरभुरा रखने के लिए 40 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत कम्पोस्ट, 20 प्रतिशत रेत और 10 प्रतिशत कोकोपीट मिला सकते हैं.
गोबर की खाद हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई होनी चाहिए. ताजी गोबर खाद डालने से गर्मी बढ़ सकती है और जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. गमले को ऊपर तक भरने के बजाय कुछ जगह खाली रखें. बाद में बेल के आसपास मिट्टी चढ़ाने में यह जगह काम आएगी. मिट्टी में पत्थर और प्लास्टिक का कचरा न रहने दें.
कटिंग लगाकर बेल को दें भरपूर धूप
शकरकंद उगाने के लिए करीब 20 से 25 सेंटीमीटर लंबी स्वस्थ कटिंग लें. कटिंग पर कम से कम तीन से चार गांठें होनी चाहिए. नीचे के पत्ते हटाकर कटिंग का कुछ हिस्सा मिट्टी में दबा दें. एक बड़े गमले में दो से तीन कटिंग लगाना काफी रहेगा. पौधों को बहुत पास लगाने से जड़ों को फैलने की जगह कम मिल सकती है. कटिंग लगाने के तुरंत बाद हल्का पानी दें. इससे मिट्टी उसके आसपास ठीक तरह से सेट हो जाएगी.
गमले को ऐसी जगह रखें जहां पौधे को हर दिन कम से कम छह से आठ घंटे सीधी धूप मिले. सही धूप नहीं मिलने पर बेल लंबी हो सकती है मगर जमीन के अंदर शकरकंद की ग्रोथ कमजोर रह सकती है. बेल बढ़ने लगे तो उसे गमले के आसपास फैलने दें. जगह कम होने पर जाली का सहारा दिया जा सकता है.
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पानी का बैलेंस रखें और समय पर करें खुदाई
शकरकंद की मिट्टी में हल्की नमी रहनी चाहिए मगर पानी जमा नहीं होना चाहिए. पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत को हाथ से चेक करें. मिट्टी सूखी लगे तभी सिंचाई करें. गर्म मौसम में पानी जल्दी सूख सकता है. बारिश के दौरान गमले की निकासी पर खास ध्यान दें. पौधा लगाने के करीब 25 से 30 दिनों बाद थोड़ी वर्मीकम्पोस्ट दी जा सकती है. पत्तियों में छेद और बेल पर कीड़े दिखाई दें तो नीम के तेल का हल्का स्प्रे किया जा सकता है.

समय समय पर सूखे पत्तों को हटाते रहें. आमतौर पर शकरकंद करीब 90 से 120 दिनों में तैयार हो सकता है. पत्तियां पीली पड़ने लगें तो गमले की मिट्टी को किनारे से हल्का हटाकर जड़ों का साइज देखें. खुदाई से करीब एक सप्ताह पहले पानी कम कर दें. शकरकंद निकालते समय नुकीले औजार का इस्तेमाल सावधानी से करें. इससे अंदर तैयार जड़ों के कटने का खतरा कम रहेगा.
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