बड़े सींगों वाली भैंस महंगी क्यों होती है, इससे क्या पता चलता है?

बड़े सींगों वाली भैंस महंगी क्यों होती है, इससे क्या पता चलता है?


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  • भैंस के सींग नस्ल, सेहत, दूध क्षमता बताते हैं.
  • सही सींग शुद्ध नस्ल, मजबूत जेनेटिक्स की पहचान हैं.
  • सींगों के छल्ले उम्र, बच्चे, पोषण और दूध क्षमता दर्शाते.

गांव के पशु मेलों से लेकर बड़े-बड़े डेयरी फार्मों तक अक्सर देखा जाता कि जब भी कोई खास बनावट और अलग तरह के घुमावदार सींगों वाली भैंस दिखाई देती है. तो उसकी बोली लाखों में पहुंच जाती है. अक्सर लोगों को यह बात हैरान कर जाती है कि आखिर सींगों भैंस कीमत से क्या लेना-देना? क्या सिर्फ सींग बड़े होने भर से कोई भैंस इतनी महंगी हो जाती है? तो आपको बता दें पशुपालन में सींग सिर्फ एक शारीर का अंग नहीं होता.

बल्कि उस जानवर की पूरी खानदानी पहचान, उसकी नस्ल और उसकी सेहत के बारे में भी बता देता है. जब कोई भैंसों का जानकार भैंस के सींगों को देखता है. तो वह उसकी जेनेटिक्स, दूध देने की क्षमता और उसकी उम्र का सटीक अंदाजा लगा लेता है. चलिए आपको बताते  हैं कि बड़े सींगों वाली भैंसों में ऐसा क्या खास होता है जिससे उनकी कीमत ज्यादा हो जाती है.

बड़े सींग भैंस के लिए खास क्यों?

पशु बाजार में किसी भी भैंस की कीमत उसकी नस्ल की शुद्धता से तय होती है और सींग इस शुद्धता का सबसे पहला मार्कर माने जाते हैं. मसलन बात की जाए तो मुर्रा नस्ल की पहचान ही उसके जलेबी जैसे मुड़े हुए, छोटे और कसे हुए सींगों से होती है. जबकि जाफराबादी जैसी भारी-भरकम नस्ल के सींग चौड़े, बड़े और नीचे की ओर लटकते हुए आगे मुड़ते हैं. जब किसी भैंस में अपनी नस्ल के तय मानकों के अनुसार बिल्कुल परफेक्ट और मजबूत सींग दिखते हैं. 

तो इसका मतलब होता है कि उसके जीन पूरी तरह अनडाइल्यूटेड हैं. उसमें किसी दूसरी लोकल और कम क्वालिटी वाली नस्ल की क्रॉस-ब्रीडिंग नहीं हुई है. ऐसे जानवर का डीएनए मजबूत होता है. जिसकी वजह से उसकी आने वाली कटड़ियां और झोटे भी उसी बढ़िया क्वालिटी के पैदा होते हैं. ब्रीडिंग करवाने वाले लोग इसी शुद्ध ब्लडलाइन के लिए मुंहमांगी रकम चुकाने को हमेशा तैयार रहते हैं.

सींग से पता चलती हैं यह बातें

पुराने जमाने के जानकार लोग भैंस खरीदने से पहले उसके दांत और सींगों को बहुत बारीकी से टटोलते हैं. क्योंकि सींग कभी झूठ नहीं बोलते. जैसे-जैसे भैंस की उम्र बढ़ती है और वह बच्चे को जन्म देती है, उसके सींगों पर एक खास तरह की छल्ला उभरने लगता हैं. पहला छल्ला आमतौर पर भैंस के पहले ब्यात यानी पहले बछड़े के जन्म के वक्त बनता है. जो करीब तीन साल की उम्र में आता है. 

इसके बाद हर नए ब्यात के साथ एक-एक छल्ला जुड़ता जाता है. इन छल्लों की संख्या देखकर कोई भी पक्का डेयरी वाला यह बता सकता है कि भैंस ने अब तक कितने बच्चे दिए हैं और उसकी रिप्रोडक्टिव साइकिल कितनी मजबूत रही है. इसके अलावा सींगों की चमक, उनकी मोटाई और मजबूती यह बताती है कि जानवर को शुरुआत से कितना कैल्शियम, मिनरल्स और पोषण मिला है. कमजोर पशु के सींग बेजान और खुरदुरे दिखने लगते हैं.

बड़े सींगों वाली भैंस महंगी क्यों होती है, इससे क्या पता चलता है?

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दूध की क्षमता पता चलती है

ऐसा माना जाता है कि जिस भैंस का शरीर, सिर और सींग जितने बड़े होंगे उसके दूध का प्रोडक्शन भी उतना ही ज्यादा होगा. बड़े सींग भारी नस्लों की शारीरिक बनावट का हिस्सा होते हैं. जो यह साबित करते हैं कि जानवर का शरीर भारी वजन और रोजाना 15 से 20 लीटर तक दूध का दबाव झेलने में पूरी तरह सक्षम है. 

एक वजह यह भी

इसके साथ ही आज के दौर में ऐसी शानदार भैंसें सिर्फ दूध का जरिया नहीं. बल्कि एक स्टेटस सिंबल बन चुकी हैं. नेशनल लेवल की पशु प्रतियोगिताओं और ब्यूटी शोज में ऐसी भैंसों को करोड़ों के इनाम मिलते हैं. अगर किसी किसान के खूंटे पर ऐसी कोई भैंस बंधी है. तो उसके सीमेन और बच्चों की एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती है. यही वजह है कि बड़े सींगों वाली भैंसें ऊंची कीमत पर बिकती हैं.

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