महोबा: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी महोबा भक्ति के रंग में रंग गई है. चंदेलकालीन प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.
12वीं सदी के अमर वीर योद्धा आल्हा-ऊदल की आराध्य मानी जाने वाली 18 भुजाओं वाली दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन के लिए महोबा समेत पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश और दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं.
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आल्हा-ऊदल की कुलदेवी और 18 भुजाओं का दुर्लभ स्वरूप
बुंदेलखंड के शौर्य और आस्था के प्रतीक इस मंदिर का इतिहास बेहद खास है. मान्यता है कि चंदेल शासक राजा परमाल के वीर सेनापति आल्हा और ऊदल किसी भी युद्ध पर जाने से पहले इसी मंदिर में अपने अस्त्र-शस्त्र रखकर मां से विजय का आशीर्वाद लेते थे.
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित मां की प्रतिमा लगभग 10 फीट से अधिक ऊंची है. 18 भुजाओं वाली इस दुर्लभ प्रतिमा में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का त्रिकोणात्मक स्वरूप समाहित है. पूरे देश में इतनी विशाल और प्राचीन पाषाण प्रतिमा विरले ही देखने को मिलती है.
पुजारी चंद्रिका प्रसाद के अनुसार: “यह स्थान सिद्ध पीठ है. मां के दरबार में सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है. सदियों से यहां भक्तों की अटूट आस्था जुड़ी है.”
सुबह 4 बजे से देर रात तक गूंज रहे जयकारे
नवरात्रि के पहले दिन सुबह चार बजे मंगला आरती के साथ ही मंदिर के कपाट खुलते ही दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक निरंतर जारी रहता है. भव्य श्रृंगार, विशेष अनुष्ठान और साफ-सफाई के बीच पूरा परिसर ‘जय माता दी’ के उद्घोष से गुंजायमान है.
श्रद्धालु रेनू गुप्ता ने बताया: “हम दशकों से नवरात्रि पर मां बड़ी चंद्रिका के दर्शन के लिए आ रहे हैं. यहां आकर जो मानसिक शांति मिलती है, वह अद्भुत है. मां हर भक्त की पुकार सुनती हैं.”
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ‘मिशन शक्ति’ की टीम मुस्तैद
बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. कतारबद्ध दर्शन कराने के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘मिशन शक्ति’ की विशेष महिला पुलिस टीम तैनात की गई है, जिससे श्रद्धालु शांतिपूर्ण माहौल में सुगमता से दर्शन कर रहे हैं.
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