13 अक्टूबर 2026 को केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव लगभग सर्वसम्मति से पारित कर दिया. ऐसा करने वाला केरल देश का पहला राज्य बन गया है. मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इसे ‘ऐतिहासिक’ बताया, जबकि बीजेपी ने इसे ‘शर्मनाक’ कहा. दूसरी तरह दिल्ली में प्रदर्शन कांग्रेस का नहीं रह गया है. करीब 23 दल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं. तो जानते हैं कि ज्ञानेश के खिलाफ कौन-कौन सामने आ चुके हैं और कैसे…
सबसे पहले केरल विधानसभा का ताजा अपडेट…
केरल विधानसभा के नियम 118 के तहत प्रस्ताव लाया गया था, जिसे पारित करने के लिए सदन के पूर्ण बहुमत की जरूरत होती है. यह प्रस्ताव कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने पेश किया, लेकिन वामपंथी दलों के नेतृत्व वाले LDF ने भी इसका पूरा समर्थन किया. 140 सदस्यों वाली विधानसभा में UDF के 102 और LDF के 35 विधायक हैं. बीजेपी के तीन विधायकों में से दो ने विरोध किया. इस प्रस्ताव में तीन बड़ी मांगें हैं:
- ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाया जाए
- SIR प्रक्रिया में हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के वोटिंग अधिकार बहाल किए जाएं
- CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में बदलाव हो
प्रस्ताव में कहा गया है कि इस समिति में प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ अब भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि चुनाव आयोग की आजादी बनी रहे. प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि वर्तमान समिति में केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं.
CEC के खिलाफ कौन-कौन सामने चुके?
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा अब सिर्फ कांग्रेस का नहीं है. 23 से ज्यादा दल एकजुट हो चुके हैं. एक-एक करके समझिए:
- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP): मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के बाद अभिजीत दीपके ने इस सैटायरिक मूवमेंट की शुरुआत की. CJP ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में मोर्चा खोला. 10 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर पर हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें अभिजीत दीपके भी शामिल थे. CJP ने साफ कह दिया कि वह अदालतों के फैसले का इंतजार नहीं करेगी. ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हर हाल में चाहिए.
- कांग्रेस: कांग्रेस ने सबसे पहले मोर्चा खोलते हुए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 30 सितंबर 2026 को विपक्षी दलों की बैठक बुलाई. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा खुद सड़कों पर उतरे, जंतर मंतर तक मार्च किया, दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी इस्तीफे की मांग की है. कांग्रेस का आरोप है कि SIR का इस्तेमाल मोदी-शाह राज को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है.
- तृणमूल कांग्रेस (TMC): ममता बनर्जी ने 30 सितंबर 2026 को ज्ञानेश कुमार को ‘चोर’ कहा था. 10 अक्टूबर 2026 को ममता बनर्जी को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिया गया. उन्होंने कहा कि दिल्ली की स्थिति ‘आपातकाल से भी बढ़कर’ हो गई है. TMC ने 13 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में बड़ी रैली का ऐलान किया है.
- वामपंथी दल: पांच प्रमुख वामपंथी दलों ने संयुक्त बयान जारी करके ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने की मांग की. CPI(M) नेता पिनराई विजयन ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के पास CEC बने रहने की कोई वैधता नहीं है. वामपंथी दलों ने तमिलनाडु में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए.
समाजवादी पार्टी (SP): अखिलेश यादव की SP ने विपक्षी एकता की बैठकों और प्रदर्शनों में भाग लिया. SP के दो सांसदों ने राजघाट तक विपक्षी पदयात्रा में हिस्सा लिया.
शिवसेना (UBT) और NCP (SP): महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार की पार्टियों ने मोर्चा संभाला. 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक साथ सड़कों पर उतरकर ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला. इस रैली में किसी पार्टी का झंडा नहीं था, सिर्फ तिरंगा और संविधान की प्रतियां थीं. शरद पवार की NCP (SP) ने भी विपक्षी एकजुटता में भाग लिया. - बीजू जनता दल (BJD): ओडिशा की BJD ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चे में शामिल होकर सबको चौंका दिया.
- तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK): तमिलनाडु के अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने भी विपक्षी मोर्चे में शामिल होकर अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत की.
- आम आदमी पार्टी (AAP): ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन किए. पार्टी ने वामपंथी दलों के साथ मिलकर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए.
इनके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी राजघाट तक विपक्षी पदयात्रा में शामिल हुए. 23 पार्टियों के प्रतिनिधि 6 अक्टूबर 2026 के विपक्षी मार्च में शामिल थे.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार क्या?
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का सबसे मजबूत हथियार खुद चुनाव आयोग के अंदर से आया. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों पर लिखित विरोध जताया.
CEC के खिलाफ पूरा देश कैसे एकजुट हुआ?
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुटता की तीन बड़ी वजहें हैं:
- सबका मुद्दा: SIR में 13 करोड़ से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए. यह हर वोटर को छूता है, किसी एक राज्य या एक समुदाय को नहीं. द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, बेला एस्टेट में 909 में से सिर्फ 1 वोटर बचा. यानी यह सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, जमीनी हकीकत है.
- गली-गली तक कॉकरोच आंदोलन: किसान आंदोलन एक सेक्टर का था. CJP ने युवाओं, स्टूडेंट्स और Gen Z को सड़कों पर उतार दिया. बेंगलुरु में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया. यह आंदोलन ऑनलाइन शुरू हुआ था, लेकिन सड़कों पर उतरकर सबको एकजुट कर दिया.
- एक मुद्दे पर सब सहमत: कांग्रेस, TMC, वामपंथी, SP, NCP और शिवसेना के अपने-अपने मतभेद हैं. ज्ञानेश कुमार ऐसा टारगेट हैं जो किसी को नाराज नहीं करता.
लेकिन एक बात याद रखनी जरूरी है…
यह एकजुटता मजबूत है, लेकिन स्थायी नहीं. कैमरा प्रतिद्वंद्वियों को एक दोपहर के लिए साथ ला सकता है, लेकिन यह तय नहीं कर सकता कि मलप्पुरम में किसे सीट मिलेगी, बंगाल में किसे जूनियर रोल स्वीकार करना होगा या 2029 के पोस्टर पर किसका चेहरा छपेगा.
फिर भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो एकजुटता दिख रही है, वह 2011 के अन्ना आंदोलन के बाद सबसे बड़ी विपक्षी एकजुटता है. इस बार सिर्फ सड़क ही नहीं, विधानसभा तक पहुंच गई है.






