इंडोनेशिया के शेयर बाजार में इन दिनों हाहाकार मचा हुआ है. बाजार में एक ही दिन में ऐसी गिरावट आई कि पिछले 28 साल का रिकॉर्ड टूट गया. शुक्रवार को जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 11.57% तक गिर गया है. यह जनवरी 1998 के बाद बाजार की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है. इस भारी बिकवाली से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ और बाजार में कारोबार भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा.
दरअसल, इस गिरावट के पीछे वैश्विक इंडेक्स प्रदाता MSCI की चेतावनी को बड़ी वजह माना जा रहा है. MSCI ने इंडोनेशिया के बाजार को मौजूदा उभरते बाजार की कैटेगरी से हटाकर ‘स्टैंडअलोन मार्केट’ का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है. अगर ऐसा होता है, तो विदेशी निवेशकों की ओर से बड़े पैमाने पर बिकावली हो सकती है.
28 साल बाद बाजार में इतनी बड़ी गिरावट
शुक्रवार को इंडोनेशिया बाजार करीब 8% की गिरावट के साथ खुला, जिसके बाद बिकावली इतनी तेज हुई कि कारोबार को 30 मिनट के लिए रोकना पड़ा. देश के बड़े बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. बैंक सेंट्रल एशिया, बैंक राक्यत इंडोनेशिया और बैंक मंदिरी के शेयर करीब 15% तक टूट गए.
इसके अलावा इंडोनेशियाई की करेंसी भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गई और 18,070 के स्तर तक पहुंच गया. इस साल अब तक इंडोनेशियाई शेयर बाजार में करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है.
MSCI की चेतावनी से क्यों बढ़ी चिंता?
MSCI ने इंडोनेशिया के बाजार में पारदर्शिता, कंपनियों के शेयरों के मालिकाना हक और ट्रेडिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं. आसान लफ्जों में कहें तो कंपनी को चिंता है कि बाजार में शेयरों के मालिक कौन हैं और उनकी खरीद-बिक्री कैसे हो रही है, इसकी जानकारी कितनी साफ और भरोसेमंद है.
ऐसे में अगर MSCI इंडोनेशिया के बाजार का दर्जा घटाता है, तो वहां निवेश करने वाले कई विदेशी फंड अपना पैसा निकाल सकते हैं. इससे बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है.
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