बांग्लादेश के ढाका और गाजीपुर में रविवार (1 नवंबर 2026) को कपड़ा उद्योग के मजदूरों ने सड़कें जाम कर दीं. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस चौकी में आग भी लगा दी. वे 30000 रुपये मासिक वेतन की मांग कर रहे है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की और मजदूरों से अपनी फैक्ट्रियों में वापस लौटने की अपील की. कपड़ा मजदूरों के लिए मौजूदा न्यूनतम वेतन की घोषणा नवंबर 2023 में की गई थी, जो उसी साल दिसंबर से लागू हुआ था. यह अगले महीने खत्म होने वाला है.
बांग्लादेश में अशांति का असर एक ऐसे क्षेत्र पर पड़ा है, जिसमें लगभग 4,000 पंजीकृत फैक्ट्रियों में 40 लाख से अधिक लोग काम करते हैं. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के अनुसार, चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश है. 2025-26 के वित्तीय वर्ष में यहां से 38.70 अरब डॉलर मूल्य के कपड़ों का निर्यात हुआ.
बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन हिंसक हुए
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर में मजदूरों ने अपनी लंबे समय से चली आ रही वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर नारे लगाते हुए ढाका-तंगेल राजमार्ग को जाम कर दिया. राजधानी से लगभग 55 किलोमीटर दूर कालियाकैरे उपजिला में, हाथों में लाठियां लिए मजदूरों ने राजमार्ग पर कई जगहों पर कब्जा कर लिया. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इनमें से कई मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले सुबह अपनी-अपनी फैक्ट्रियों में हाजिरी लगाई थी.
अखबार ने स्थानीय पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी इफ्तिखार हुसैन के हवाले से बताया कि गाजीपुर में प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग के बीचों-बीच एक पुलिस चौकी में आग लगा दी. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की पांच टुकड़ियों को तैनात किया गया.
मेट्रो स्टेशन के गेट बंद करने पड़े
प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका में मीरपुर के कई हिस्सों से आए मजदूरों ने एक मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिसके कारण स्थानीय मेट्रो स्टेशन के गेट बंद करने पड़े. मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया. सरकार ने वेतन बोर्ड का गठन किया.
श्रम और रोजगार मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने न्यूनतम वेतन बोर्ड के गठन की घोषणा की और मजदूरों से सड़कों से हटने की अपील की. BD news24 की रिपोर्ट के अनुसार, सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों को सबसे अधिक प्राथमिकता दे रही है.





