ATF में एथेनॉल मिलाने की खबर सच या अफवाह? जानिए सरकार ने क्या कहा

ATF में एथेनॉल मिलाने की खबर सच या अफवाह? जानिए सरकार ने क्या कहा


सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ कि सरकार अब पेट्रोल की तरह हवाई जहाज़ के ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल – ATF में भी एथेनॉल मिलाने जा रही है ? दावा इतना बड़ा था कि लोगों ने विमान की सुरक्षा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए लेकिन जब पूरे मामले की पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ और ही निकली.  सरकार ने साफ किया है कि ATF में सीधे एथेनॉल मिलाने की कोई योजना नहीं है. नया नियम दरअसल सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल – SAF से जुड़ा है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भ्रम फैल गया.

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) को सोशल मीडिया पर दावा किया कि केंद्र सरकार डीजल और ATF में एथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है. उन्होंने इसे विमान सुरक्षा के लिए खतरा बताया ! हालांकि इस दावे के साथ कोई सरकारी आदेश, तकनीकी रिपोर्ट या विशेषज्ञ की राय साझा नहीं की गई. करीब ढाई घंटे बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने X पर जवाब देते हुए कहा कि ATF में एथेनॉल मिलाने का दावा पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है. उन्होंने साफ किया कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

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सरकार ने आखिर बदला क्या है?

केजरीवाल ने कहा कि एथेनॉल और SAF दो बिल्कुल अलग चीजें हैं और इन्हें मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि SAF दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित विमान ईंधन है जो सख्त सुरक्षा जांच के बाद ही उपयोग में लाया जाता है. पूरे विवाद की जड़ यही है. सरकार ने 17 अप्रैल 2026 को एक अधिसूचना जारी कर ATF से जुड़े पुराने नियमों में संशोधन किया. लेकिन इस अधिसूचना में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि विमान के ईंधन में सीधे एथेनॉल मिलाया जाएगा. असल बदलाव सिर्फ इतना है कि अब SAF मिले हुए ATF को भी कानूनी तौर पर मान्यता मिल गई है यानी सरकार ने सिर्फ नियमों का दायरा बढ़ाया है ताकि भविष्य में प्रमाणित SAF का इस्तेमाल किया जा सके.

SAF क्या है और एथेनॉल से कैसे अलग है?

SAF यानी Sustainable Aviation Fuel कोई साधारण एथेनॉल नहीं है. इसे कई तरह के कच्चे माल से बनाया जा सकता है जिनमें इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल, कृषि अवशेष, बायो वेस्ट और एथेनॉल भी शामिल हैं लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि विमान में सीधे एथेनॉल डाला जाता है.

एथेनॉल से जेट फ्यूल कैसे बनता है?

एथेनॉल को एक खास रासायनिक प्रक्रिया से गुजारा जाता है जिसे Alcohol to Jet या Ethanol to Jet तकनीक कहा जाता है. इस प्रक्रिया में एथेनॉल पूरी तरह बदलकर जेट फ्यूल जैसे हाइड्रोकार्बन में बदल जाता है. यही अंतिम ईंधन SAF कहलाता है यानी पेट्रोल में एथेनॉल अपनी मूल अवस्था में मौजूद रहता है लेकिन हवाई जहाज़ के ईंधन में ऐसा नहीं होता. वहां एथेनॉल पहले ही पूरी तरह बदल चुका होता है.

क्या SAF सुरक्षित है?

सरकार का कहना है कि SAF को इस्तेमाल से पहले दुनिया के सबसे सख्त सुरक्षा मानकों से गुजरना पड़ता है. ICAO और ASTM जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे विमान में इस्तेमाल किया जा सकता है. बिना सर्टिफिकेशन के कोई भी SAF विमान के टैंक तक नहीं पहुंच सकता.

भारत की क्या तैयारी है?

भारत भी धीरे-धीरे SAF अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सरकार ने 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1% SAF ब्लेंडिंग, 2028 तक 2% और 2030 तक 5% ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा है. इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी देश की पहली प्रमाणित SAF उत्पादन इकाई बन चुकी है.

दुनिया में क्या स्थिति है?

दुनिया भर में अब तक लाखों उड़ानों में SAF का इस्तेमाल किया जा चुका है. हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसकी कीमत है. SAF अभी पारंपरिक जेट फ्यूल की तुलना में कई गुना महंगा है और इसकी उपलब्धता भी सीमित है. यही वजह है कि पूरी दुनिया अभी इसे धीरे-धीरे अपनाने की रणनीति पर काम कर रही है. साफ है सरकार ने हवाई जहाज़ के ईंधन में सीधे एथेनॉल मिलाने का कोई फैसला नहीं किया है. नया नियम सिर्फ SAF को कानूनी और तकनीकी रूप से शामिल करने के लिए लाया गया है. एथेनॉल सिर्फ एक कच्चा माल हो सकता है अंतिम विमान ईंधन नहीं. इसलिए फिलहाल विमान की सुरक्षा को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. असली चुनौती SAF की लागत, उत्पादन और उपलब्धता है जिस पर भारत समेत पूरी दुनिया काम कर रही है.

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