- हेरा पंचमी पर लक्ष्मी मंदिर में आगमन का प्रयास करती हैं।
- क्रोधित लक्ष्मी रथ का एक पहिया तुड़वाकर लौट जाती हैं।
- बहुदा यात्रा में भगवान जगन्नाथ को प्रवेश नहीं मिलता।
- रसगुल्ले भेंटकर लक्ष्मी को मनाते हैं भगवान जगन्नाथ।
Jagannath Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं. इनमें सबसे रोचक प्रसंग भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के बीच के प्रेम और मीठी नोक-झोंक का है. यह कहानी हमें सिखाती है कि भगवान भी मानवीय भावनाओं से अछूते नहीं हैं.
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ‘हेरा पंचमी’ कहा जाता है. ओड़िआ भाषा में ‘हेरा’ का अर्थ है ‘देखना’ या ‘निहारना’.
- नाराजगी का कारण: जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ गुंडीचा मंदिर (अपनी मौसी के घर) जाते हैं, तो वे माता लक्ष्मी को मुख्य मंदिर में ही छोड़ जाते हैं.
- मिलन की आस: पाँच दिनों तक प्रतीक्षा करने के बाद, माता लक्ष्मी भगवान से मिलने की चाह में गुंडीचा मंदिर पहुँचती हैं.
- सेवकों द्वारा रोक: जब भगवान के सेवक माता लक्ष्मी को अंदर जाने से रोक देते हैं, तो देवी का क्रोध चरम पर पहुँच जाता है.
कैसे टूटा ‘नंदीघोष’ का पहिया?
अपने अपमान और विरह से क्रोधित होकर माता लक्ष्मी एक अनोखा कदम उठाती हैं, देवी अपने सेवकों को आदेश देती हैं कि वे भगवान जगन्नाथ के रथ ‘नंदीघोष’ का एक पहिया (लकड़ी का एक हिस्सा) तोड़ दें. यह उनके विरोध का एक प्रतीकात्मक तरीका था. इसके बाद, वह मुख्य मार्ग से न जाकर ‘हेरा गोहिरी साहि’ के गुप्त मार्ग से चुपचाप श्री मंदिर लौट आती हैं.
बहुदा यात्रा और नीलाद्रि बिजे
रथ यात्रा के 9वें दिन भगवान की वापसी की यात्रा शुरू होती है, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है. लेकिन मुख्य मंदिर में प्रवेश इतना आसान नहीं होता.
- नीलाद्रि बिजे: आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी को जब भगवान मंदिर पहुँचते हैं, तो इस अनुष्ठान को ‘नीलाद्रि बिजे’ कहा जाता है.
- द्वार पर रुकावट: माता लक्ष्मी के आदेश पर जय-विजय द्वार बंद कर दिए जाते हैं. बड़े भाई बलराम और सुभद्रा जी को तो प्रवेश मिल जाता है, लेकिन भगवान जगन्नाथ को बाहर ही रोक दिया जाता है.
रसगुल्ले से मनेगी बात: एक मीठा अंत
भगवान जगन्नाथ अपनी रूठी हुई पत्नी को मनाने के लिए कई जतन करते हैं, वे द्वार के बाहर से ही माता लक्ष्मी की स्तुति करते हैं और उन्हें मनाने के लिए उनकी सबसे प्रिय मिठाई ‘रसगुल्ला’ भेंट करते हैं.क्षमा और मिलन: रसगुल्ले की मिठास और भगवान के प्रेम को देखकर माता लक्ष्मी का क्रोध शांत हो जाता है. वे द्वार खोल देती हैं और भगवान का भव्य स्वागत होता है.
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