Navgrah Shukra Dev Katha: एक समय स्वर्गलोक के सत्ता सिंहासन पर आसीन इन्द्रदेव ने सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु से अनुरोध किया कि आप लोग क्रमशः अपने मुख से अपना-अपना शुभ, अशुभ, आकृति-प्रकृति, व्यक्तित्व, प्रभाव, शक्ति, पराक्रम और गरिमा का वर्णन करें. तब नवग्रहों में सबसे सूर्य, फिर चंद्रमा,फिर मंगल, फिर बुध और फिर गुरु बृहस्पति ने अपने गुणों का गुणगान किया, जिसकी कथा हमने आपको बताई थी. यहां पढ़ें- Navgrah Katha 5: नवग्रहों में मैं देव गुरु बृहस्पति हूं… जानें कैसे बदलता हूं भाग्य और ज्ञान
शुक्र ग्रह की कथा (Shukra Dev ki Kahani)
देव गुरु बृहस्पति ने जब अपने गुण और स्वभाव का वर्णन किया जब इंद्रसभा में शुक्र ने अपने गुणों का गुणगान करते हुए कहा- मैं आकाशमंडल में सबसे अधिक तेजस्वी, श्यामल और गौर वर्ण से युक्त ग्रह हूं. मेरे उदय और अस्त का विशेष महत्व माना जाता है. विद्या, वाणी, कला, साहित्य और संगीत का प्रभाव मेरे द्वारा आंका जाता है.
मैं मनुष्यों में सौंदर्य प्रेम, श्रृंगार, अभिनय कला और आकर्षण का संचार करता हूं. पुरुषों के वीर्य तथा दांपत्य सुख पर भी मेरा प्रभाव माना जाता है. माता का सुख, वाहन सुख और सम्मान भी मेरी कृपा से प्राप्त होता है.
मैं व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने वाला ग्रह हूं. मुझे सुगंध, सुंदर वस्त्र और प्रसाधन प्रिय हैं. मेरे प्रभाव वाले जातक देवताओं के उपासक, आकर्षक व्यक्तित्व वाले, चंचल स्वभाव के, रूपवान और प्रभावशाली वक्ता होते हैं. जिस व्यक्ति पर मेरी कृपा होती है, वह नेता, अभिनेता, नर्तक, संगीतकार या कलाकार बन सकता है.
लेकिन जब मैं अशुभ या क्रोधित हो जाता हूं, तब व्यक्ति को दांपत्य जीवन में परेशानियां, संतान सुख में बाधा, शारीरिक कमजोरी और जीवन में अभाव का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे लोगों को सुख-सुविधाएं आसानी से प्राप्त नहीं होतीं.
मेरे वार में जन्म लेने वाला व्यक्ति जीवन में शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के फल प्राप्त करता है तथा दीर्घायु होता है. मुझे प्रसन्न करने के लिए स्वच्छता, सुंदर रहन-सहन, मंत्र जाप और व्रत का विशेष महत्व माना गया है. जो व्यक्ति श्रद्धा से मेरी उपासना करता है, मैं उसके जीवन में सुख, वैभव और समृद्धि प्रदान करता हूं.
मेरी स्वराशि वृषभ और तुला है. मीन मेरी उच्च राशि और कन्या मेरी नीच राशि मानी जाती है. शनि मेरा मित्र और बृहस्पति मेरा शत्रु माना गया है. जिन जातकों की कुंडली में मैं शुभ स्थिति में होता हूं, उन्हें विलासिता, सम्मान, कला और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है.
ये भी पढ़ें: Navgrah Katha 4: नवग्रहों में पढ़ें बुध देव की कथा
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.






