Pradosh Vrat 2026 May: मई 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब है, जानें तिथि, मुहूर्त, नियम और महत्व

Pradosh Vrat 2026 May: मई 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब है, जानें तिथि, मुहूर्त, नियम और महत्व


Pradosh Vrat May 2026 Date: भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए प्रदोष व्रत को सबसे श्रेष्ठ व्रत माना जाता है. इस दिन किए पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता आती है और नकारात्मकता दूर होती है. हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास से जानते हैं, मई महीने में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत.

मई में प्रदोष व्रत कब-कब (Pradosh Vrat 2026 Date May)

मई महीने का पहला प्रदोष व्रत (Guru Pradosh Vrat 2026)- मई महीने का पहला प्रदोष व्रत ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रही है. कैलेंडर के अनुसार, 14 मई 2026 को मई का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा. पंचांग (Panchang) के मुताबिक, 14 मई को सुबह 11:20 से ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी और 15 मई को सुबह 08:31 पर इसका समापन होगा. प्रदोष व्रत की पूजा संध्याकाल में मान्य होती है, इसलिए 14 मई को ही मई महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा. गुरुवार का दिन होने से इस गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा.
पूजा का मुहूर्त (Guru Pradosh Vrat Puja Time)- गुरु प्रदोष व्रत पर 14 मई को पूजा के लिए शाम 07 बजकर 04 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक का मुहूर्त रहेगा.

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मई महीने का दूसरा प्रदोष व्रत (Guru Pradosh Vrat 2026)- मई महीने का दूसरा प्रदोष व्रत ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रही है. कैलेंडर के अनुसार, 28 मई 2026 को मई का दूसरा प्रदोष व्रत रखा जाएगा. पंचांग (Panchang) के मुताबिक, 28 मई को सुबह 07:56 से ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी और 29 मई को सुबह 09:50 पर इसका समापन होगा. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में होती है, इसलिए 28 मई को ही मई महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा. गुरुवार का दिन होने से इसे भी गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा और इस तरह से मई महीने में दो गुरु प्रदोष व्रत का संयोग बनेगा.
पूजा का मुहूर्त (Guru Pradosh Vrat Puja Time)-
गुरु प्रदोष व्रत पर 28 मई को पूजा के लिए शाम 07 बजकर 12 मिनट से रात 09 बजकर 15 मिनट तक का मुहूर्त रहेगा.

प्रदोष व्रत के नियम (Pradosh Vrat Niyam)

  • व्रत वाले दिन फलाहार या सात्विक भोजन ही करें.
  • प्रदोष व्रत में क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें.
  • इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
  • प्रदोष व्रत पर जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है.
  • प्रदोष व्रत में सुबह के बजाय शाम में प्रदोष काल के समय पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है.

प्रदोष व्रत का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं. इसलिए प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा का महत्व है. इस दिन किए पूजा-अर्चना से शीघ्र फल मिलता है और कामना पूर्ति होती है. प्रदोष व्रत स जातकों को न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है, बल्कि इससे जीवन की समस्याएं भी दूर होती हैं. प्रदोष व्रत की पूजा और व्रत को ऋण, शत्रु बाधा, ग्रह दोष मुक्ति के लिए भी फलदायी माना गया है.

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