Surdas Jayanti 2026: भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त और महाकवि सूरदास की जयंती हर साल पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. आज मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को श्रद्धापूर्वक सूरदास जयंती मनाई जा रही है.
सूरदास जयंती के विशेष दिन पर लोग भजन-कीर्तन और खासकर सूरसागर के पदों का गायन करते हैं. इसके साथ ही सूरदास द्वारा दिखाए भक्ति मार्ग का स्मरण करते हैं और उनके विचारों को ग्रहण करते हैं.
हिंदी साहित्य के भक्ति काल में सूरदास जी का योगदान अतुलनीय है.उनके दोहे और विचार आज भी प्रासंगिक है. सूरदास की सबसे प्रसिद्ध रचना ‘सूरसागर’ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन मिलता है. इसेक साथ ही सूरदास ने सूरसारावली और साहित्य लहरी जैसे ग्रंथ भी रचे. उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ गहरी मानवीय संवेदनाएं- प्रेम, करुणा और समर्पण भी झलकती है. सूरदास जयंती के इस अवसर पर जानिए उनके प्रसिद्ध दोहे और विचार.
सूरदास के प्रसिद्ध दोहे (Surdas 10 Famous Dohe)
जो पै जिय लज्जा नहीं, कहा कहौं सौ बार।
एकहु अंक न हरि भजे, रे सठ ‘सूर’ गंवार॥
सुनि परमित पिय प्रेम की, चातक चितवति पारि।
घन आशा सब दुख सहै, अंत न याँचै वारि॥
कह जानो कहँवा मुवो, ऐसे कुमति कुमीच।
हरि सों हेत बिसारिके, सुख चाहत है नीच॥
सदा सूँघती आपनो, जिय को जीवन प्रान।
सो तू बिसर्यो सहज ही, हरि ईश्वर भगवान्॥
मीन वियोग न सहि सकै, नीर न पूछै बात।
देखि जु तू ताकी गतिहि, रति न घटै तन जात॥
प्रभु पूरन पावन सखा, प्राणनहू को नाथ।
परम दयालु कृपालु प्रभु, जीवन जाके हाथ॥
जिन जड़ ते चेतन कियो, रचि गुण तत्व विधान।
चरन चिकुर कर नख दिए, नयन नासिका कान॥
असन बसन बहु बिधि दये, औसर-औसर आनि।
मात पिता भैया मिले, नई रुचहि पहिचानि॥
देखो करनी कमल की, कीनों जल सों हेत।
प्राण तज्यो प्रेम न तज्यो, सूख्यो सरहिं समेत॥
दीपक पीर न जानई, पावक परत पतंग।
तनु तो तिहि ज्वाला जरयो, चित न भयो रस भंग॥
सूरदास के अनमोल वचन (Surdas Quotes in Hindi)
- जब भक्ति दिल से होती है, तो हमें आंखों की जरूरत नहीं होती, बस एक दयालु हृदय ही काफी होता है.
- अगर हम भगवान से प्यार कर रहे हैं, तो हम दुनिया की अच्छाई से प्यार कर सकते हैं
- जो ईश्वर सदा अपने साथ रहने वाला है, प्राणों का भी प्राण है, उस प्रभू को तूने अनायास ही संसार की इस मोह माया में भुला दिया है.
- सूरदास कहते हैं- अगर आप भगवान कृष्ण को नहीं पा सकते हैं, तो उन्हें अपने माता-पिता के अंदर महसूस करें.
- मछली के प्रेम की निराली गति को देखो कि इसका शरीर चला जाता है तो भी उसका पानी के प्रति प्रेम रत्ती-भर भी कम नहीं होता.
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