Osho World: ‘मन का कोई दर्पण ही नहीं, तो धूल कहां जमेगी?’ ओशो की इस कहानी में है आत्मज्ञान का र

Osho World: ‘मन का कोई दर्पण ही नहीं, तो धूल कहां जमेगी?’ ओशो की इस कहानी में है आत्मज्ञान का र

Osho World: सत्य के बारे में जानना और सत्य को जानना, दोनों अलग बातें हैं. केवल शास्त्रों और शब्दों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, वास्तविक ज्ञान अनुभव और आत्मबोध से आता है. जब मन की कल्पनाएं, अहंकार और धारणाएं शांत हो जाती हैं, तब सत्य स्वयं प्रकट होता है. साधना का सार बाहर कुछ पाने […]

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