आलू के दाम गिरे तो किसानों को मिलेंगे 35 हजार रुपये, जानें कैसे उठाएं लाभ

आलू के दाम गिरे तो किसानों को मिलेंगे 35 हजार रुपये, जानें कैसे उठाएं लाभ


Bhamashah Yojana UP: आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है. अगर बाजार में आलू के दाम गिर जाते हैं और किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है, तो अब उन्हें होने वाले नुकसान की कुछ भरपाई सरकार करेगी. इसके लिए उत्तर प्रेदेश सरकार एक खास योजना शुरू की गई है. 

इसके तहत आलू का बाजार भाव कम होने पर किसानों को अनुदान दिया जाएगा. वहीं, जो किसान अपना आलू निजी शीतगृहों में रखते हैं, उन्हें भंडारण शुल्क में भी आर्थिक मदद मिलेगी. यानी बाजार में भाव कम होने पर किसानों पर पूरा नुकसान नहीं पड़ेगा.

आलू के दाम गिरने पर कैसे मिलेगी मदद?

इस योजना का मकसद आलू की कीमतों में अचानक गिरावट आने पर किसानों को राहत देना है. इसके लिए भाव स्थिरता कोष के तहत अनुदान दिया जाएगा. अगर बाजार में आलू का भाव इतना कम हो जाता है कि किसान को उसकी लागत भी नहीं मिल पा रही है, तो सरकार तय नियमों के हिसाब से आर्थिक मदद देगी. इसमें किसान को न्यूनतम उत्पादन लागत का 25 प्रतिशत या उत्पादन लागत और आलू की बिक्री कीमत के बीच का अंतर, इन दोनों में से जो रकम कम होगी, उतना अनुदान मिलेगा. इससे कम दाम पर आलू बेचने वाले किसानों का नुकसान कुछ कम हो सकेगा.

एक किसान को मिलेंगे अधिकतम 35 हजार रुपये

योजना के तहत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाएगा. एक किसान को अधिकतम 35 हजार रुपये तक की मदद मिल सकती है. हालांकि, इसके लिए कुछ सीमाएं भी तय की गई हैं. एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर में आलू की खेती के आधार पर लाभ मिलेगा. वहीं, प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल उत्पादन को ही अनुदान के लिए गिना जाएगा.

उदाहरण के तौर पर, अगर किसान अपना आलू 500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचता है, तो तय नियमों के अनुसार उसे 175 रुपये प्रति क्विंटल तक अनुदान मिल सकता है.

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योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी हैं ये शर्तें

इस योजना का फायदा लेने के लिए किसान के पास फॉर्मर आईडी होनी चाहिए. साथ ही, उसे एग्रीटेक पोर्टल पर आलू उत्पादक के तौर पर पंजीकरण कराना जरूरी है. किसान के खेत में कितना आलू बोया गया है, इसका हिसाब खसरा-खतौनी के आधार पर तय होगा. इसके अलावा, किसान को आधार कार्ड और बैंक पासबुक की जानकारी देनी होगी. सबसे जरूरी बात यह है कि किसान ने मंडी में जो आलू बेचा है, उसकी बिक्री की रसीद भी दिखानी होगी. इसी के आधार पर अनुदान का लाभ दिया जाएगा.

शीतगृह में आलू रखने पर भी मिलेगी राहत

कई बार बाजार में भाव कम होने पर किसान आलू को तुरंत बेचने के बजाय शीतगृह में रख देते हैं. लेकिन इसके लिए भी उन्हें भंडारण शुल्क देना पड़ता है. ऐसे किसानों को राहत देने के लिए निजी शीतगृहों में रखे आलू के भंडारण प्रभार पर भी अनुदान की व्यवस्था की गई है. इससे किसानों को फसल रखने का खर्च कम करने में मदद मिलेगी.

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