एक दिन, दो पर्व, 14 सितंबर सुहागिनों-कुंवारी कन्याओं के लिए क्यों है खास जानें

एक दिन, दो पर्व, 14 सितंबर सुहागिनों-कुंवारी कन्याओं के लिए क्यों है खास जानें


Hartalika teej and Ganesh Chaturthi 14 September 2026: इस बार 14 सितंबर 2026, सोमवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है, क्योंकि इसी दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व मनाए जाएंगे. पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया और गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से जुड़ी है.

सुबह तीज, दोपहर में गणेश पूजन का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को हरतालिका तीज की सुबह पूजा का समय लगभग सुबह 6:03 से 8:27 बजे तक और गणेश चतुर्थी की मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक है. स्थापना के लिए ये शुभ मुहूर्त रहेगा. 

हरतालिका तीज
  • हरतालिका तीज माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की कथा से जुड़ी है.
  • सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं. वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी और मनचाहे वर की कामना से यह व्रत कर सकती हैं.
गणेश चतुर्थी
  • दूसरी ओर गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के प्राकट्य का पर्व है. इस दिन घर में गणपति की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा की जाती है.
  • गणेशजी को विघ्नहर्ता और शुभारंभ के देवता माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा सुख-समृद्धि, बुद्धि और कार्यों में सफलता की कामना से की जाती है. 

सुहागिन महिलाएं कैसे करें पूजा?

  • हरतालिका तीज पर महिलाएं स्नान के बाद साफ कपड़े पहने, लाल या हरे रंग की साड़ी, चूड़ियां जरुर पहनें.
  • चूंकि तीज-चौथ एक ही दिन है इसलिए पूजा का संकल्प तृतीया तिथि के रहते हुए ही ले लें और शिव पार्वती का पूजन करें.
  • मिट्टी या बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जाती है.
  • माता को सुहाग की सामग्री, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद हरतालिका तीज की कथा सुनकर आरती करें.
  • जो महिलाएं रात्रि में जागरण कर पूजन करती हैं वो सुबह पूजा के बाद अपनी परंपरा अनुसार इसका पालन कर सकती हैं.

कुंवारी कन्याएं कैसे रखें व्रत

कुंवारी लड़कियां भी हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन कर सकती हैं. वे अच्छे जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत और पूजा करें. यदि स्वास्थ्य अनुकूल न हो तो कठोर निर्जला व्रत रखने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार करना अधिक उचित है, मान्यता है कि पहली बार इस व्रत का संकल्प जिस विधि से लिया जाता है उसे ताउम्र उसी तरह पालन करना होता है. जैसे फलाहार, निर्जला, निराहार व्रत का संकल्प लें तो हर साल पूजन में उसका पालन करें.

हरतालिका तीज पूजा और गणेश स्थापना के जरूरी नियम

  • सुबह स्नान करके दोनों पर्वों के लिए अलग-अलग पूजा सामग्री तैयार करें.
  • सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी आदि सुहाग सामग्री अर्पित करें
  • कुंवारी कन्याएं माता पार्वती को पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित कर मनचाहे वर की कामना करें.
  • तीज की पूजा संपन्न होने के बाद मिट्टी या बालू के शिव पार्वती का विधिवत विसर्जन करना जरुरी है.
  • गणपति की स्थापना के बाद आवाहन, आसन, स्नान, वस्त्र, चंदन, अक्षत, दूर्वा, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें.
  • गणेशजी को दूर्वा और मोदक अर्पित कर आरती करें.
  • गणेश स्थापना के बाद घर में गंदी, क्लेश, विवाद न करें. 
  • रोजाना बप्पा की पूजा, आरती, भोग लगाएं. घर को सुनसान न छोड़े. स्थापना वाली जगह पर अंधेरा न करें.

गणेश स्थापना की विधि

  • घर के स्वच्छ स्थान पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं.
  • चौकी पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें.
  • गणेशजी के सामने कलश स्थापित कर उसके ऊपर नारियल रखें.
  • गणपति का आवाहन करके जल, अक्षत, चंदन, पुष्प और दूर्वा अर्पित करें.
  • मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्य चढ़ाएं.
  • धूप, दीप जलाकर गणेश मंत्र का जाप करें.
  • गणेश चतुर्थी की कथा और आरती करें.
  • परिवार की सुख समृद्धि और सभी बाधाओं के दूर होने की प्रार्थना करें.

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