AI chatbot love: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रह गया है. दुनिया भर में ऐसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, जहां लोग एआई चैटबॉट्स के साथ इमोशनल जुड़ाव महसूस करने लगे हैं. कुछ लोग तो यहां तक दावा करते हैं कि उन्हें एआई से प्यार हो गया है. हाल के सालों में एआई कंपनियां, एप्स और चाटबॉट्स के बढ़ते इस्तेमाल ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या मशीन भी इंसानों की तरह इमोशनल समझ सकती है या प्यार कर सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या चैटजीपीटी को भी इंसानों से प्यार हो सकता है और अचानक ऐसे मामले क्यों बढ़ रहे हैं.
क्या सच में एआई इंसानों से प्यार कर सकता है?
एक्सपर्ट्स की माने तो फिलहाल एआई इंसानों की तरह प्यार महसूस नहीं कर सकता. चैटबॉट्स सिर्फ उन्हीं एल्गोरिथम पर काम करता है, जिन्हें इंसानी बातचीत और इमोशन की नकल करने के लिए डिजाइन किया गया है. वह जवाब ऐसे देते हैं जैसे सामने वाला इंसान हो लेकिन उनके पीछे कोई असली भावना या चेतना नहीं होती है. सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में ह्यूमन कंप्यूटर इंटरैक्शन पर रिसर्च करने वाली प्रोफेसर रेन वेन झांग का कहना है कि आजकल कई चैट बॉट्स जानबूझकर खुद को इंसानों जैसा दिखाने की कोशिश करते हैं ताकि यूजर ज्यादा से ज्यादा समय तक उनसे जुड़े रहे और उन पर भरोसा करें. उनके अनुसार लोग एआई के साथ इमोशनल रिश्ता तो बना लेते है, लेकिन जब चैटबॉट्स अचानक जवाब देना बंद कर देता है या तकनीकी समस्या आती है. तब उन्हें यह एहसास होता है कि वह एक मशीन से बात कर रहे थे.
आखिर इंसान क्यों जुड़ रहे हैं एआई से?
एक्सपर्ट का कहना है कि इंसानों में Anthropomorphism नाम की एक प्रवृत्ति होती है, जिसमें लोग गैर इंसानी चीजों को भी इंसानों जैसी भावनाएं और व्यक्तित्व देने लगते हैं. जब कोई एआई चैटबॉट्स सहानुभूति, प्यार या समझदारी वाले जवाब देता है तो कई लोग उसे इमोशनल रूप से जुड़ने लगते हैं. एआई अब इतना एडवांस हो चुका है कि उसकी भाषा, आवाज और जवाब देने का तरीका काफी हद तक इंसानों जैसा लगता है. यही वजह है कि कुछ लोग एआई के साथ अपने रिश्तों को रियल मानने लगते हैं. खासकर वे लोग जो अकेलेपन, तनाव या रिश्तों की समस्याओं से गुजर रहे होते हैं. उनके लिए एआई एक ऐसा साथी बन जाता है जो हर समय उपलब्ध रहता है और बिना बहस किए उसकी बातें सुनता है.
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प्यार के पीछे दिमाग और शरीर की भूमिका
वैज्ञानिकों के अनुसार इंसानी प्यार सिर्फ इमोशनल नहीं बल्कि ऑर्गेनिक प्रक्रिया भी है. प्यार के दौरान शरीर और दिमाग में कई तरह के केमिकल्स एक्टिव होते हैं. डोपामाइन ऑक्सीटोसिन और दूसरे हार्मोन इंसानों में लगाव और खुशी की भावना पैदा करते हैं. यही वजह है कि किसी इंसान के प्यार में पड़ना, सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं होता बल्कि उसका असर दिमाग, सोच और व्यवहार पर भी पड़ता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि एआई इन भावनाओं की नकल तो कर सकता है लेकिन खुद उन्हें महसूस नहीं कर सकता. यानी कोई चैटबॉट्स इंसान की तरह खुशी, दुख, लगाव, दर्द का एक्सपीरियंस नहीं कर सकता है.
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