खेती के लिए इस बैंक से किराए पर मशीनें ले सकते हैं किसान, जानें कैसे उठा सकते हैं फायदा?

खेती के लिए इस बैंक से किराए पर मशीनें ले सकते हैं किसान, जानें कैसे उठा सकते हैं फायदा?


Farm Machinery Bank Benefits : भारत में खेती अब धीरे-धीरे आधुनिक तकनीक पर आधारित हो रही है, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए महंगे कृषि उपकरण खरीदना आसान नहीं होता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने कृषि यंत्र बैंक या कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) योजना शुरू की है. इस योजना के तहत किसानों, युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को कृषि मशीनरी बैंक या यंत्र केंद्र खोलने के लिए सरकार की ओर से भारी सब्सिडी दी जाती है. इन केंद्रों से किसान ट्रैक्टर, थ्रेशर, सीड ड्रिल, हार्वेस्टर जैसी मशीनें किराए पर लेकर खेती कर सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि खेती के लिए किसान कैसे इस बैंक का फायदा उठा सकते हैं?

कृषि यंत्र बैंक क्या है?

कृषि यंत्र बैंक एक ऐसा केंद्र होता है, जहां खेती से जुड़ी मशीनें और उपकरण उपलब्ध होते हैं. किसान इन मशीनों को खरीदने की जगह कम किराए पर उपयोग कर सकते हैं. इससे किसानों को यह फायदा होता है कि उन्हें महंगे उपकरण खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. समय और मेहनत दोनों बचते हैं. खेती आधुनिक और आसान बनती है. साथ ही छोटे किसानों को भी मशीनों का लाभ मिलता है. इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार के कई उद्देश्य हैं. जैसे ग्रामीण युवाओं को रोजगार देना, किसानों को सस्ती दर पर मशीनें उपलब्ध कराना, छोटे और सीमांत किसानों की खेती को आसान बनाना, आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देना, फसल अवशेष प्रबंधन और कृषि उत्पादन को बेहतर करना, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि बिजली उपयोग और क्षमता बढ़ाना है. 

कृषि यंत्र बैंक की खास बातें

सरकार ने इस योजना को राज्य के कई जिलों में लागू किया है. किसानों और युवाओं को कृषि यंत्र बैंक खोलने पर सब्सिडी मिलती है. कुल लागत पर 40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. कुछ मामलों में 10 लाख रुपये तक की परियोजना पर सहायता मिलती है. विशेष योजनाओं में अधिकतम 8 लाख रुपये तक की सब्सिडी भी दी जाती है. 

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 कैसे उठा सकते हैं फायदा?

किसान इस योजना का फायदा बहुत आसान तरीके से उठा सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपने जिले के कृषि विभाग या ऑनलाइन DBT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. रजिस्ट्रेशन के बाद किसान कृषि यंत्र बैंक या कस्टम हायरिंग सेंटर से मशीनें जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेशर आदि अपनी जरूरत के अनुसार किराए पर ले सकते हैं. इसके लिए उन्हें सिर्फ तय किराया देना होता है, जो बाजार से काफी कम होता है. जिन किसानों या समूहों को यंत्र बैंक खोलने की सब्सिडी मिलती है, वे सरकार से अनुदान लेकर सेंटर शुरू कर सकते हैं और आगे अन्य किसानों को मशीनें किराए पर देकर कमाई भी कर सकते हैं. 

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