Watermelon Growing Tips: गर्मियों के मौसम में ठंडे और रसीले तरबूज खाने का मजा ही कुछ और है, और अगर यह तरबूज आपकी खुद की छत पर उगे गमले का हो तो स्वाद दोगुना हो जाता है. कई लोग सोचते हैं कि तरबूज जैसी भारी बेल को सिर्फ बड़े खेतों में ही उगाया जा सकता है. लेकिन सही तकनीक और थोड़ी सी देखभाल से आप इसे अपने घर के छोटे से गमले में भी बहुत आसानी से उगा सकते हैं.
गमले में तरबूज उगाने के लिए सबसे जरूरी है सही साइज के पॉट का चुनाव करना और मिट्टी में सही न्यूट्रिएंट्स मिक्स करना. जब पौधे पर छोटे-छोटे फल आने लगते हैं तो असली केयर गेम तब शुरू होता है जिससे फल बीच में ही खराब न हों. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे कुछ आसान गार्डनिंग टिप्स को फॉलो करके आप अपनी छत पर ही बाजार जैसे बड़े लाल और एकदम मीठे तरबूज पा सकते हैं.
सही गमले का चुनाव
तरबूज की जड़ें काफी फैलती हैं और इसके फल का वजन भी भारी होता है. इसलिए आपको बड़े साइज का गमला चुनना होगा. इसके लिए कम से कम 18 से 24 इंच का बड़ा गमला या ग्रो बैग सबसे सही रहता है. ध्यान रहे कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए ताकि एक्स्ट्रा पानी जमा न हो.
उपजाऊ मिट्टी तैयार करना
तरबूज के लिए ऐसी मिट्टी चाहिए जो हल्की हो और जिसमें पानी बिल्कुल न ठहरे. मिट्टी तैयार करने के लिए आप 40% नॉर्मल बगीचे की मिट्टी, 30% वर्मीकंपोस्ट या पुरानी गोबर की खाद, 20% कोकोपीट और 10% रेत या कंक्रीट मिला लें. इस मिक्सचर से मिट्टी में हवा बनी रहती है और जड़ें बहुत तेजी से ग्रो करती हैं.
बीज लगाने का तरीका
हमेशा अच्छी और हाइब्रिड क्वालिटी के तरबूज के बीज इस्तेमाल करें. तैयार की गई मिट्टी में लगभग आधा इंच गहरा छेद करके बीज को दबा दें और ऊपर से हल्का पानी छिड़क दें. गमले को ऐसी जगह पर रखें जहां 6 से 8 घंटे की अच्छी और सीधी धूप आती हो. लगभग 6 से 8 दिनों के अंदर बीज से छोटे पौधे बाहर आ जाएंगे.
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सही खाद का शेड्यूल
तरबूज एक हैवी फीडर पौधा है जिसे लगातार अच्छे पोषण की जरूरत होती है. शुरुआत में पौधे की ग्रोथ के लिए हर 15 दिन में दो मुट्ठी गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिट्टी में मिलाएं. जैसे ही पौधे पर फूल और छोटे-छोटे फल आने लगें, तब मिट्टी में पोटैशियम और फास्फोरस के लिए सीवीड लिक्विड फर्टिलाइजर या रॉक फास्फेट देना शुरू करें इससे तरबूज का साइज बड़ा और मीठा होता है.
फल आने के बाद पानी देने का सही तरीका
तरबूज में लगभग 90 परसेंट से ज्यादा पानी होता है इसलिए इसकी बेल को रेगुलर और सही मात्रा में पानी मिलना बेहद जरूरी है. जब गमले के पौधे पर तरबूज के छोटे-छोटे फल सेट हो रहे हों तो मिट्टी में नमी लगातार बनी रहनी चाहिए क्योंकि मिट्टी सूखने से फल समय से पहले ही गिर सकते हैं.
इस बात का रखें ध्यान
हालांकि पानी देते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि गमले में पानी जमा न हो क्योंकि ओवर-वाटरिंग से जड़ें सड़ सकती हैं और फल भी बेस्वाद हो सकते हैं. जैसे ही तरबूज अपने पूरे साइज में आ जाए और पकने के करीब हो, तब पानी देना थोड़ा कम कर देना चाहिए.
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