दिल्ली से लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर तक आग की घटनाओं ने हर किसी का दिल दहला दिया है. क्या आप जानते हैं कि आग लगने की घटनाओं में ज्यादातर मौतें आग की लपटों से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं से दम घुटने के कारण होती हैं? क्या आप यह भी जानते हैं कि आपकी खूबसूरत दीवारों पर लगा पेंट इस जहरीले धुएं का बहुत बड़ा कारण हो सकता है? गौर करने वाली बात यह है कि आजकल हर कोई अपने घर को सुंदर और सुरक्षित बनाना चाहता है. हम घर के दरवाजों, वायरिंग और अन्य सुरक्षा चीजों पर तो लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन दीवारों के पेंट पर ध्यान नहीं देते. बाजार में ऐसे कई पेंट मौजूद हैं, जो फायर रेसिस्टेंट तकनीक के हिसाब से तैयार किए जाते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में..
क्या है भारत में आग लगने का आंकड़ा?
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में ही भारत में आग लगने की 7000 से ज्यादा घटनाएं हुईं, जिनमें करीब 6900 लोगों ने अपनी जान गंवाईं. साल 2026 तक आते-आते यह आंकड़ा और भी डरावना हो गया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बंद इमारतों या घरों में जब आग लगती है तो लोग लपटों से कम और दीवारों के पेंट या प्लास्टिक के जलने से निकलने वाले जहरीले धुएं (कार्बन मोनोऑक्साइड आदि) के कारण ज्यादा जान गंवाते हैं. दिल्ली-मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में हुए हालिया हादसे इसके सबसे बड़े और दुखद उदाहरण हैं.
आपका पुराना पेंट आग में कैसे बन जाता है ‘ईंधन’?
ज्यादातर भारतीय घरों में आज भी एक्रिलिक और प्लास्टिक-इमल्शन पेंट (Plastic-Emulsion Paint) का इस्तेमाल होता है. यह पेंट बहुत चमकता है और सस्ता भी पड़ता है, लेकिन इसमें ‘पेट्रोलियम-पॉलिमर’ का बेस होता है. आसान शब्दों में कहें तो इन पेंट्स में एक तरह का केमिकल होता है, जो आग लगने पर बिल्कुल पेट्रोल या प्लास्टिक की तरह काम करता है. जब आग लगती है तो यह पेंट दीवारों पर तेजी से जलने लगता है और पूरे घर में जहरीला धुआं फैला देता है. इससे घर में फंसे लोगों का दम घुटने लगता है और उन्हें बाहर निकलने का समय ही नहीं मिल पाता है.
इसका समाधान क्या है?
इस जानलेवा समस्या को रोकने के लिए ‘सिलिकेट मिनरल पेंट’ सबसे बेहतरीन और सुरक्षित उपाय बनकर सामने आए हैं. ये पेंट पूरी तरह से प्राकृतिक और अकार्बनिक होते हैं. इन्हें पोटैशियम सिलिकेट और खनिजों से बनाया जाता है. इनमें पेट्रोलियम बेस नहीं होता, इसलिए ये आग नहीं पकड़ते हैं. अगर कमरे में भीषण आग लग भी जाए तो यह पेंट जलेगा नहीं, सिर्फ थोड़ा झुलस जाएगा. सबसे बड़ी बात यह है कि ये पेंट किसी तरह का जहरीला धुआं नहीं छोड़ते हैं.
दीवार का हिस्सा बन जाता है यह पेंट
जायडेक्स ग्रुप के एमडी डॉ. मौलिक रांका के मुताबिक, पारंपरिक पेंट दीवार के ऊपर सिर्फ प्लास्टिक की परत बनाते हैं, जो आग में पपड़ी बनकर जलने लगती है. वहीं, मिनरल पेंट कंक्रीट, ईंट या प्लास्टर के साथ एक रासायनिक बंधन बना लेता है. यह पेंट पुतने के बाद दीवार का हिस्सा बन जाता है. ऐसे में यह न तो कभी पपड़ी बनकर गिरता है और न ही आग को फैलने देता है. यह धुएं को कम करके लोगों को घर से सुरक्षित बाहर निकलने के लिए ज्यादा समय देता है. इस जानलेवा समस्या को रोकने के लिए सिलिकेट मिनरल पेंट तकनीक सबसे बेहतरीन और सुरक्षित उपाय साबित हो रही है.
यह भी पढ़ें: घर में आग लगने की सबसे बड़ी वजह होती हैं ये चीजें, तुरंत चेक करें चेक






