तीन बार लगातार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी को 2026 के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. साल 2011 से पहले पश्चिम बंगाल की सरकार राइटर्स बिल्डिंग से चलती थी. ममता बनर्जी के जीवन में एक वक्त ऐसा भी था जब वो राज्य के सेक्रेटरिएट राइटर्स बिल्डिंग में सीएम से मिलने पहुंची थीं और वहां के पुलिसवालों ने उन्हें उठाकर बाहर फेंक दिया था. ममता बनर्जी के साथ हुए उस वाकये ने उन्हें बंगाल का मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा दी.
ज्योति बसु की सरकार के दौरान घटी घटना
ये बात 1993 की है. तब पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की सरकार थी, जिसके मुख्यमंत्री ज्योति बसु थे. अप्रैल 1991 में हुए विधानसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट ने 244 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस सिर्फ 47 पर सिमट गई थी. कांग्रेस ने इस चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था, लेकिन छोटे-मोटे विरोध प्रदर्शनों के अलावा कांग्रेस कुछ खास हासिल नहीं कर पाई थी.
उस वक्त ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष हुआ करती थीं. 1990 में सीपीएम के हमले में उनकी जान बच गई थी, जिसके बाद राजीव गांधी ने प्रदेश नेतृत्व को बाइपास करते हुए ममता को सीधे बंगाल यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया था. इसके अलावा 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने जीत दर्ज की थी और प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने उन्हें केंद्र में मंत्री भी बना दिया था.
उस वक्त बंगाल में एक रेप केस की वजह से सीपीएम सरकार पर गंभीर आरोप लग रहे थे. एक निशक्त महिला के साथ रेप हुआ था और वो गर्भवती हो गई थी. इसका आरोप सीपीएम के एक नेता पर लगा था. उस महिला को न्याय दिलाने के लिए केंद्र में मंत्री ममता बनर्जी ने सीएम से मुलाकात करने का फैसला किया. उन्हें 6 जनवरी, 1993 की शाम 3 बजे का अपॉइंटमेंट मिला था. ममता बनर्जी पीड़ित महिला, विधायक शोवनदेव चटर्जी और कुछ नेताओं को साथ लेकर राइटर्स बिल्डिंग पहुंचीं. तब राइटर्स बिल्डिंग स्टेट सेक्रेटरिएट हुआ करती थी. मुख्यमंत्री ज्योति बसु का वही दफ्तर था.
लालबाजार लॉकअप में ममता को किया बंद
ममता बनर्जी राइटर्स बिल्डिंग में तीन घंटे तक सीएम ज्योति बसु के दफ्तर के बाहर बैठी रहीं. सीएम दफ्तर में थे, लेकिन उन्होंने ममता से मिलने से इनकार कर दिया था. वो ममता से मिले बिना राइटर्स बिल्डिंग से बाहर निकल गए थे. इसके बाद पुलिस ने ममता को दफ्तर से बाहर जाने को कहा. ममता बनर्जी ने बाहर जाने से इनकार कर दिया. फिर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. ममता बनर्जी को भी चोट लगी. पुलिस ने पीड़ित महिला पर भी लाठियां चलाईं और फिर पुलिस ने सबको उठाकर लालबाजार लॉकअप में बंद कर दिया. अगले दिन पुलिस ने ममता बनर्जी को रिहा कर दिया.
ममता ने CPM की सत्ता को उखाड़ फेंकने की कसम खाई
लालबाजार लॉकअप के बाहर यूथ कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता थे. उनके साथ ममता बाहर निकलीं. मेयो रोड क्रासिंग के पास महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने ममता रुकीं. उन्होंने वहां कहा कि जब तक वो बंगाल से सीपीएम की सत्ता को उखाड़ नहीं देतीं, तब तक वो राइटर्स बिल्डिंग में कदम नहीं रखेंगी. ममता ने जो कहा, वो किया. करीब 18 साल बाद 20 मई, 2011 को ममता ने राइटर्स बिल्डिंग में कदम रखा. लेफ्ट का 34 साल लंबा शासन खत्म हो चुका था और ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की नई मुख्यमंत्री बन गई थीं.
हालांकि राइटर्स बिल्डिंग से निकाले जाने और मुख्यमंत्री के तौर पर राइटर्स बिल्डिंग में कदम रखने के बीच 18 साल का फासला था. इन 18 साल में ममता बनर्जी को कई बार पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ा, कई बार अपनों ने धोखा दिया, कई बार मरते-मरते बचीं, लेकिन उन्होंने अपने संघर्ष से जो मुकाम पश्चिम बंगाल में हासिल किया, उसकी दूसरी मिसाल फिलहाल देखने को नहीं मिलती है.
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