डॉक्टरों से भी तेज निकला AI! इमरजेंसी में इंसानों से बेहतर ले रहा फैसले, स्टडी में हुआ खुलासा

डॉक्टरों से भी तेज निकला AI! इमरजेंसी में इंसानों से बेहतर ले रहा फैसले, स्टडी में हुआ खुलासा


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  • AI डॉक्टरों की जगह नहीं, बल्कि सहायक के रूप में उपयोगी।

AI Vs Doctor: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि तेजी से मेडिकल फील्ड में भी अपनी जगह बना रहा है. आज के AI मॉडल लिखने, डेटा का विश्लेषण करने और कोडिंग जैसे काम इंसानों के बराबर या कई बार उससे बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं. इसी बढ़ती क्षमता को देखते हुए वैज्ञानिक अब यह जांचने में जुटे हैं कि क्या AI डॉक्टरों की तरह क्लिनिकल फैसले भी ले सकता है. इसी दिशा में हाल ही में एक बड़े स्तर पर रिसर्च की गई जिसमें AI और डॉक्टरों की तुलना अलग-अलग मेडिकल परिस्थितियों में की गई.

हार्वर्ड स्टडी में क्या सामने आया?

इस शोध को Harvard Medical School और Beth Israel Deaconess Medical Center के विशेषज्ञों ने मिलकर अंजाम दिया. इसका मकसद यह समझना था कि क्या AI वही काम कर सकता है, जो डॉक्टर रोजमर्रा की प्रैक्टिस में करते हैं.

स्टडी में पाया गया कि एक एडवांस्ड AI मॉडल कई मामलों में डॉक्टरों से ज्यादा सटीक साबित हुआ. खासतौर पर इमरजेंसी स्थितियों में निर्णय लेने, संभावित बीमारी पहचानने और आगे के इलाज के कदम तय करने में AI ने बेहतर या बराबरी का प्रदर्शन किया.

इमरजेंसी रूम में किया गया खास प्रयोग

रिसर्च के दौरान 76 इमरजेंसी केस लिए गए, जिनमें मरीजों की स्थिति के अनुसार तुरंत फैसले लेने की जरूरत थी जैसे किसे प्राथमिकता दी जाए या किसे ICU में भर्ती किया जाए. इन मामलों में डॉक्टरों के निर्णयों की तुलना AI मॉडल से की गई, जिसमें OpenAI o1 और OpenAI GPT-4o जैसे मॉडल शामिल थे.

इसके बाद कुछ अन्य डॉक्टरों ने बिना यह जाने कि कौन सा निर्णय इंसान ने दिया है और कौन सा AI ने, सभी जवाबों का मूल्यांकन किया. नतीजे चौंकाने वाले थे AI ने हर चरण में या तो डॉक्टरों से बेहतर प्रदर्शन किया या उनके बराबर रहा.

बिना किसी बदलाव के डेटा पर हुआ परीक्षण

इस स्टडी की एक खास बात यह रही कि AI को वही जानकारी दी गई जो उस समय मरीज के रिकॉर्ड में मौजूद थी. किसी भी तरह का अतिरिक्त प्रोसेसिंग या बदलाव नहीं किया गया. इसके बावजूद AI ने शुरुआती फैसलों में भी काफी सटीकता दिखाई जो शोधकर्ताओं के लिए भी अप्रत्याशित था.

क्या AI डॉक्टरों की जगह ले लेगा?

हालांकि यह नतीजे काफी प्रभावशाली हैं, लेकिन वैज्ञानिक साफ तौर पर कहते हैं कि AI अभी डॉक्टरों की जगह लेने के लिए तैयार नहीं है. यह तकनीक मददगार टूल की तरह काम कर सकती है, लेकिन पूरी तरह से उस पर निर्भर रहना सही नहीं होगा.

AI कई बार सही बीमारी पहचान सकता है, लेकिन साथ ही ऐसे टेस्ट भी सुझा सकता है जिनकी जरूरत न हो और जो मरीज के लिए जोखिम भरे साबित हो सकते हैं. इसलिए अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी अभी भी इंसानों के हाथ में ही रहनी चाहिए.

भविष्य की दिशा क्या है?

यह स्टडी इस बात का संकेत जरूर देती है कि आने वाले समय में AI हेल्थकेयर का अहम हिस्सा बन सकता है. सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह डॉक्टरों का काम आसान बना सकता है और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकता है. लेकिन फिलहाल AI को एक सहायक के रूप में ही देखा जा रहा है, न कि डॉक्टरों के विकल्प के रूप में.

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