दिल्ली में गर्मी का कहर, बच्चों की सेहत बचाने के लिए सरकार का बड़ा कदम; स्कूलों में ‘वॉटर बेल’

दिल्ली में गर्मी का कहर, बच्चों की सेहत बचाने के लिए सरकार का बड़ा कदम; स्कूलों में ‘वॉटर बेल’


दिल्ली इन दिनों आग उगलती धूप से जूझ रही है. सुबह से ही सूरज की तपिश ऐसी होती है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. सड़कों पर लू के थपेड़े महसूस हो रहे हैं और दोपहर तक हालात और भी खराब हो जाते हैं. इस भीषण गर्मी का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ता है, जो रोज स्कूल जाते हैं और घंटों क्लास में बैठते हैं. इसी खतरे को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जो सीधे बच्चों की सेहत से जुड़ा है.

सरकार ने सभी स्कूलों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं. अब पढ़ाई से पहले बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दी जाएगी. आदेश साफ है कि हर स्कूल में अब एक खास तरह की घंटी बजेगी, जिसे नाम दिया गया है ‘वॉटर बेल’. यह घंटी क्लास खत्म होने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों को पानी पीने की याद दिलाने के लिए बजेगी.

गर्मी में अक्सर बच्चे खेलते-कूदते या पढ़ाई में लगे रहते हैं और समय पर पानी पीना भूल जाते हैं. इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसे डिहाइड्रेशन कहते हैं. कई बार यही लापरवाही चक्कर आने, उल्टी, सिरदर्द और लू जैसी गंभीर परेशानी का कारण बन जाती है. डॉक्टर भी लगातार सलाह देते हैं कि गर्मी में थोड़े-थोड़े समय पर पानी पीते रहना चाहिए. इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह नई व्यवस्था लागू की है.

क्या हैं नई गाइडलाइंस?

नई गाइडलाइंस के अनुसार हर 45 से 60 मिनट के बीच स्कूल में घंटी बजेगी. जैसे ही यह घंटी बजेगी, शिक्षक बच्चों को कुछ मिनट का ब्रेक देंगे ताकि वे आराम से पानी पी सकें. स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों के लिए साफ और ठंडा पानी उपलब्ध हो. जहां जरूरत हो, वहां अतिरिक्त पानी के कूलर या फिल्टर की व्यवस्था भी करनी होगी.

सरकार का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में पढ़ाई का दबाव इतना न हो कि बच्चे अपनी सेहत को नजरअंदाज कर दें. इसलिए यह व्यवस्था सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू करनी होगी. स्कूल प्रशासन को साफ निर्देश दिए गए हैं कि इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाए.

दिल्ली में इन दिनों हीटवेव को लेकर रेड अलर्ट जैसी स्थिति बनी हुई है. तापमान लगातार 45 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है. ऐसे में बच्चों के शरीर पर इसका असर जल्दी पड़ता है. छोटे बच्चे अक्सर प्यास लगने पर भी ध्यान नहीं देते. इसी वजह से यह ‘वॉटर बेल’ एक छोटी लेकिन बेहद जरूरी पहल मानी जा रही है.

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