पाकिस्तान में ‘ब्लैकआउट’ का डर! पश्चिम एशिया युद्ध के बीच तेल के लिए तड़पा पड़ोसी देश

पाकिस्तान में ‘ब्लैकआउट’ का डर! पश्चिम एशिया युद्ध के बीच तेल के लिए तड़पा पड़ोसी देश


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  • मध्य पूर्व तनाव से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ीं, पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की।

Pakistan Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कई देशों के हालात बिगड़ गए हैं. इन दिनों पाकिस्तान बढ़ते तेल संकट और महंगे आयात बिल से जूझ रहा है. हाल ही में पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली मलिक ने माना कि देश के पास कोई रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास केवल 5 से 7 दिनों का कच्चे तेल का भंडार है, जबकि केस विपणन कंपनियों के पास मौजूद रिफाइंड ईंधन का स्टॉक लगभग 20 से 21 दिनों तक चल सकता है.

यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि ईरान युद्ध के चलते देश का तेल आयात बिल तेजी से बढ़ा है. पहले पाकिस्तान हर हफ्ते लगभग 300 मिलियन डॉलर का तेल आयात करता था, लेकिन अब यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर प्रति हफ्ते पहुंच गया है. यानी तेल बिल में लगभग 167 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

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भारत से तुलना क्यों कर रहा पाकिस्तान?

अली मलिक ने भारत की ऊर्जा तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान भारत की तरह नहीं है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत अपने भंडार से तेल जारी कर सके. उनके मुताबिक भारत के पास 60 से 70 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है, जिससे आपूर्ति संकट की स्थिति में राहत मिल सकती है.

भारत ऐसा क्या अलग कर रहा है?

भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं.

जानें भारत की रणनीति की मुख्य बातें

  • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए.
  • साथ ही तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई.
  • मध्य पूर्व पर निर्भरता कम की.
  • रूस से बड़े पैमाने पर तेल भी खरीदा.
  • 2026 की शुरुआत में वेनेजुएला से आयात फिर से शुरू किया.

इन्हीं सब कदमों के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव के बाद भी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

LPG की कीमतों पर क्या असर?

भारत में 1 अप्रैल को 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़े थे. इसके बाद से कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है. यह दिखाता है कि भारत वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता के बीच भी स्थिति को संतुलित रखने में सफल रहा है.

पाकिस्तान ने बनाई विशेष टास्क फोर्स

बढ़ते तेल संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने एक खास टास्क फोर्स बनाई है. इसका काम तेल सप्लाई की निगरानी करना और ईंधन की कीमतों की रोज समीक्षा करना है. हालांकि, बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान में ईंधन की खपत में थोड़ी कमी भी दर्ज की गई है, जो मांग में गिरावट का संकेत देती है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी का असर

मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे टाइम तक नाकेबंदी के चलते पूरी दुनिया में तेल बाजार प्रभावित हुआ है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग रूट्स में से एक है. इसके चलते  गुरुवार को दुनिया भर में तेल की कीमतें और बढ़ गईं. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2022 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. जून के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 0057 GMT तक $1.91 या 1.62 प्रतिशत बढ़कर $119.94 प्रति बैरल हो गया, जबकि जून के लिए US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट वायदा 63 सेंट या 00.59 प्रतिशत बढ़कर $107.51 प्रति बैरल हो गया.

पाकिस्तान क्यों बढ़ा रहा मध्यस्थता की कोशिश?

ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव को देखते हुए पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है. शहबाज शरीफ ने दावा किया कि 11 अप्रैल को पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच करीब 21 घंटे चली बातचीत में मदद की थी.



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