पैसे वाले गेम्स पर सख्ती! रियल मनी और ई-स्पोर्ट्स होंगे अलग, सट्टेबाजी पर लगेगी लगाम

पैसे वाले गेम्स पर सख्ती! रियल मनी और ई-स्पोर्ट्स होंगे अलग, सट्टेबाजी पर लगेगी लगाम


Online Mobile Games In India News: ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए सरकार के नए नियम अब लागू होने जा रहे हैं. ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026’ 1 मई 2026 से प्रभावी होंगे, जिससे देश में ऑनलाइन गेमिंग के पूरे ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

 ये नियम 2025 में बने कानून के तहत तैयार किए गए हैं और इनका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन पैसे वाले गेम्स से होने वाले आर्थिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान को रोकना है साथ ही सुरक्षित और वैध गेमिंग प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देना है.

रियल मनी और ई-स्पोर्ट्स होंगे अलग

नए नियम लागू होने के बाद अब हर ऑनलाइन गेम की प्रकृति को लेकर स्पष्टता लाई जाएगी. एक तय प्रक्रिया के तहत यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन सा गेम ‘पैसे वाला गेम’ है और कौन सा सामान्य सोशल गेम या ई-स्पोर्ट्स के दायरे में आता है.

इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि गेम में पैसे लगते हैं या नहीं, जीतने पर आर्थिक लाभ मिलता है या नहीं, कंपनी का रेवेन्यू मॉडल क्या है और रिवॉर्ड किस तरीके से दिए जाते हैं. नियमों के अनुसार इस पूरी जांच प्रक्रिया को यथासंभव 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा और इसका परिणाम एक आधिकारिक आदेश के रूप में दर्ज होगा.

Online Gaming Authority of India करेगा निगरानी

इन नियमों के तहत एक नई नियामक संस्था ‘Online Gaming Authority of India’ बनाई जा रही है जो पूरे ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर की निगरानी करेगी. यह संस्था MeitY के अधीन काम करेगी और इसका मुख्यालय दिल्ली में होगा. 

इसे एक डिजिटल कार्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा जो गेम्स की सूची जारी करने शिकायतों की जांच करने, दिशा-निर्देश जारी करने और विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर नियमों को लागू कराने का काम करेगी.  

रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू लेकिन हर गेम के लिए अनिवार्य नहीं

नए नियमों के तहत ऑनलाइन गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी लागू की जा रही है, हालांकि यह हर गेम के लिए अनिवार्य नहीं होगी.  सरकार केवल उन गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी करेगी, जिनमें यूजर्स के लिए जोखिम अधिक है जहां बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन होता है या जिन्हें ई-स्पोर्ट्स के रूप में पेश किया जाता है.

रजिस्ट्रेशन मिलने पर संबंधित गेम या प्लेटफॉर्म को एक डिजिटल सर्टिफिकेट और यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा जो अधिकतम 10 सालों तक मान्य रहेगा. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी पैसे वाला गेम ई-स्पोर्ट्स के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं कर सकेगा.

कंपनियों को लागू करने होंगे जरूरी फीचर्स

इन नियमों में यूजर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. इसके तहत गेमिंग कंपनियों को कई अनिवार्य सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे, जिनमें उम्र की पुष्टि, समय सीमा तय करना, पैरेंटल कंट्रोल, शिकायत दर्ज करने की सुविधा, काउंसलिंग सपोर्ट और फेयर प्ले की निगरानी शामिल हैं. 

कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ये सभी फीचर्स पारदर्शी तरीके से यूजर्स के सामने उपलब्ध हों और उन्हें पहले से इसकी जानकारी दी जाए. इसका उद्देश्य खासकर बच्चों और कमजोर वर्ग के यूजर्स को ऑनलाइन गेमिंग के नकारात्मक प्रभाव से बचाना है.

30 दिन में अपील का अधिकार

यूजर्स की शिकायतों के समाधान के लिए नए नियमों में दो-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है. पहले स्तर पर संबंधित गेमिंग कंपनी को ही शिकायत का समाधान करना होगा. अगर यूजर कंपनी के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है या समय पर समाधान नहीं मिलता है तो वह 30 दिनों के भीतर नियामक अथॉरिटी के पास अपील कर सकता है. इसके बाद भी यदि मामला सुलझता नहीं है तो अंतिम अपील MeitY के सचिव के पास की जा सकती है जहां 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा. 

नियम तोड़ने पर 90 दिन में कार्रवाई और पेनल्टी तय

नए नियमों के तहत उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है. जांच की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से पूरा किया जाएगा और इसे 90 दिनों के भीतर समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है.

 पेनल्टी तय करते समय यह देखा जाएगा कि कंपनी ने नियमों के उल्लंघन से कितना लाभ कमाया, यूजर्स को कितना नुकसान हुआ, गलती की गंभीरता क्या थी और क्या यह गलती बार-बार की गई है. 

 नजर आता है कि सरकार का मन ऑनलाइन गेमिंग को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं बल्कि उसे नियमों के दायरे में लाकर सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है ताकि यूजर्स का भरोसा बना रहे और इंडस्ट्री भी व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सके.

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