फैशन की दुनिया में फिर लौटे मद्रास चेक्स, जानें क्या है नया?

फैशन की दुनिया में फिर लौटे मद्रास चेक्स, जानें क्या है नया?


मद्रास चेक्स दक्षिण भारत, खासकर चेन्नई से जुड़ा पारंपरिक सूती कपड़ा है. इसकी सबसे बड़ी पहचान रंग-बिरंगे चौकोर चेक्स और हल्के वजन वाला फैब्रिक है. पहले इसका इस्तेमाल लुंगी, शर्ट और रोजमर्रा के कपड़ों में ज्यादा होता था. सालों तक भारत से यह कपड़ा अमेरिका और दूसरे देशों में भी निर्यात किया गया और वहां भी इसे काफी पसंद किया गया.

मद्रास चेक्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान 1958 में मिली, जब अमेरिकी आयातक विलियम जैकब्सन ने प्राकृतिक रंगों से तैयार मद्रास कॉटन को अमेरिका भेजा. इसके बाद Brooks Brothers जैसे बड़े ब्रांड ने इसे अपने रेडी-टू-वियर कलेक्शन में शामिल किया. शुरुआत में कपड़े का रंग धुलने पर उतरने लगा, लेकिन विज्ञापन विशेषज्ञ डेविड ओगिल्वी ने इसी खासियत को Bleeding Madras के नाम से पेश किया. इसके बाद यही कपड़ा अमेरिकी प्रेपी फैशन और आइवी लीग स्टाइल की पहचान बन गया.

मद्रास चेक्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान 1958 में मिली, जब अमेरिकी आयातक विलियम जैकब्सन ने प्राकृतिक रंगों से तैयार मद्रास कॉटन को अमेरिका भेजा. इसके बाद Brooks Brothers जैसे बड़े ब्रांड ने इसे अपने रेडी-टू-वियर कलेक्शन में शामिल किया. शुरुआत में कपड़े का रंग धुलने पर उतरने लगा, लेकिन विज्ञापन विशेषज्ञ डेविड ओगिल्वी ने इसी खासियत को Bleeding Madras के नाम से पेश किया. इसके बाद यही कपड़ा अमेरिकी प्रेपी फैशन और आइवी लीग स्टाइल की पहचान बन गया.

चेन्नई के रणवीर शाह और उनके परिवार ने महसूस किया कि असली मद्रास चेक्स की पहचान धीरे-धीरे मशीन से बने नकली कपड़ों के बीच खोती जा रही है. इसी सोच के साथ उन्होंने दो हैंडलूम से असली मद्रास फैब्रिक को फिर से बुनना शुरू किया. उनके मुताबिक चीन और दूसरे देशों में बनने वाले मद्रास चेक्स असली नहीं हैं, इसलिए इस कला को बचाने के लिए इसकी शुरुआत उसी जगह से करनी जरूरी थी, जहां इसका जन्म हुआ था.

चेन्नई के रणवीर शाह और उनके परिवार ने महसूस किया कि असली मद्रास चेक्स की पहचान धीरे-धीरे मशीन से बने नकली कपड़ों के बीच खोती जा रही है. इसी सोच के साथ उन्होंने दो हैंडलूम से असली मद्रास फैब्रिक को फिर से बुनना शुरू किया. उनके मुताबिक चीन और दूसरे देशों में बनने वाले मद्रास चेक्स असली नहीं हैं, इसलिए इस कला को बचाने के लिए इसकी शुरुआत उसी जगह से करनी जरूरी थी, जहां इसका जन्म हुआ था.

रणवीर शाह और उनके बेटे प्रसन शाह ने पारंपरिक बुनाई को मॉडर्न डिजाइन के साथ जोड़ने का काम किया. डिजाइनर अब पुराने रंग और चेक्स पैटर्न को बनाए रखते हुए ऑर्गेनिक धागे, नेचुरल रंग और पर्यावरण के अनुकूल फाइबर का इस्तेमाल कर रहे हैं. रणवीर शाह का कहना है कि उनका मकसद किसी ट्रेंड का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि इस कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है. वे फ्यूचर में परिवारों के लिए अलग-अलग पहचान वाले मद्रास चेक्स तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं, जैसे स्कॉटलैंड में अलग-अलग परिवारों के टार्टन पैटर्न होते हैं.

रणवीर शाह और उनके बेटे प्रसन शाह ने पारंपरिक बुनाई को मॉडर्न डिजाइन के साथ जोड़ने का काम किया. डिजाइनर अब पुराने रंग और चेक्स पैटर्न को बनाए रखते हुए ऑर्गेनिक धागे, नेचुरल रंग और पर्यावरण के अनुकूल फाइबर का इस्तेमाल कर रहे हैं. रणवीर शाह का कहना है कि उनका मकसद किसी ट्रेंड का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि इस कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है. वे फ्यूचर में परिवारों के लिए अलग-अलग पहचान वाले मद्रास चेक्स तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं, जैसे स्कॉटलैंड में अलग-अलग परिवारों के टार्टन पैटर्न होते हैं.

दुनिया के कई बड़े डिजाइनर और फैशन ब्रांड अब फिर से मद्रास चेक्स को अपने कलेक्शन में शामिल कर रहे हैं. Dior के फॉल 2023 शो में मुंबई में पेश किए गए कलेक्शन में रंग-बिरंगे चेक्स देखने को मिले. Burberry ने भी अपने स्प्रिंग और समर कलेक्शन में हल्के चेक्स वाले डिजाइन पेश किए. डिजाइनर निकोलस डेली ने अपने कलेक्शन में मद्रास चेक्स के इतिहास और सांस्कृतिक सफर को दिखाया, जबकि 2025 में उन्होंने Clarks Originals के साथ मिलकर भी इस फैब्रिक का इस्तेमाल किया.

दुनिया के कई बड़े डिजाइनर और फैशन ब्रांड अब फिर से मद्रास चेक्स को अपने कलेक्शन में शामिल कर रहे हैं. Dior के फॉल 2023 शो में मुंबई में पेश किए गए कलेक्शन में रंग-बिरंगे चेक्स देखने को मिले. Burberry ने भी अपने स्प्रिंग और समर कलेक्शन में हल्के चेक्स वाले डिजाइन पेश किए. डिजाइनर निकोलस डेली ने अपने कलेक्शन में मद्रास चेक्स के इतिहास और सांस्कृतिक सफर को दिखाया, जबकि 2025 में उन्होंने Clarks Originals के साथ मिलकर भी इस फैब्रिक का इस्तेमाल किया.

भारत में Wunderhaus Handmade, No Grey Area, JADE, Gul Sohrab और Heritage by Hamza जैसे कई ब्रांड मद्रास चेक्स को नए अंदाज में पेश कर रहे हैं. कहीं इससे टी-शर्ट, विंडचीटर और ट्राउजर बनाए जा रहे हैं, तो कहीं सूट, स्कर्ट और दूसरी मॉडर्न ड्रेस तैयार की जा रही हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पॉपुलैरिटी बढ़ने के बाद हैंडलूम बुनकरों की आर्थिक स्थिति अभी भी चुनौती बनी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि असली हैंडलूम मद्रास चेक्स को बेहतर पहचान और संगठित बाजार मिलने से बुनकरों को भी इसका फायदा मिल सकता है.

भारत में Wunderhaus Handmade, No Grey Area, JADE, Gul Sohrab और Heritage by Hamza जैसे कई ब्रांड मद्रास चेक्स को नए अंदाज में पेश कर रहे हैं. कहीं इससे टी-शर्ट, विंडचीटर और ट्राउजर बनाए जा रहे हैं, तो कहीं सूट, स्कर्ट और दूसरी मॉडर्न ड्रेस तैयार की जा रही हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पॉपुलैरिटी बढ़ने के बाद हैंडलूम बुनकरों की आर्थिक स्थिति अभी भी चुनौती बनी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि असली हैंडलूम मद्रास चेक्स को बेहतर पहचान और संगठित बाजार मिलने से बुनकरों को भी इसका फायदा मिल सकता है.

Published at : 02 Aug 2026 09:20 AM (IST)

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