मान नहीं रहे ट्रंप, अमेरिका ने लगातार 12वें दिन फिर किया हमला तो गुस्से में बोला ईरान- ‘आंख के

मान नहीं रहे ट्रंप, अमेरिका ने लगातार 12वें दिन फिर किया हमला तो गुस्से में बोला ईरान- ‘आंख के


US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है. बुधवार को अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात ईरान पर हवाई हमले किए. सीजफायर समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और तेज हो गया है. इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी ऊर्जा और आर्थिक ढांचे पर हमला हुआ तो वह क्षेत्र के तेल, गैस, बिजली और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाएगा. बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है.

लगातार 12वीं रात अमेरिकी हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि ताजा हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर किए गए. सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और नागरिक नौवहन को खतरा पहुंचा सके. सेंटकॉम ने बयान में कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक ईरान की समुद्री मार्गों को बाधित करने की क्षमता को और कमजोर नहीं कर दिया जाता.

 

ट्रंप की चेतावनी के बीच ईरान का जवाब

ईरान ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने उसके बुनियादी ढांचे पर हमला किया तो जवाब में क्षेत्र के तेल, गैस, बिजली और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाएगा. ईरान के विदेश मंत्री  अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हमारी रक्षा नीति बिल्कुल स्पष्ट है, आंख के बदले आंख. ईरान या उसके बुनियादी ढांचे पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो उसका शक्तिशाली और निर्णायक जवाब दिया जाएगा.” ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वे क्षेत्र से तेल के निर्यात को भी रोक सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सबसे ज्यादा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दिखाई दे रहा है. दुनिया में तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है. ईरान द्वारा इस मार्ग पर लगभग पूर्ण नाकेबंदी जैसी स्थिति बनने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग प्रभावित हुई है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखा. ब्रेंट क्रूड का भाव कुछ समय के लिए 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया और बाद में 94 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा. ईंधन आपूर्ति को लेकर भी वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है.
अमेरिका का कहना है कि यदि ईरान को इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण मिल जाता है तो यह वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए खतरनाक उदाहरण साबित होगा.

बाब-अल-मंदेब में हूती विद्रोहियों की धमकी से बढ़ा खतरा

तनाव अब फारस की खाड़ी से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंच गया है. ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी अरब के तेल जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है. यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद पांच तेल टैंकरों ने लाल सागर में अपना रास्ता बदल दिया. सऊदी अरब भी अब अपने तेल टैंकरों को वैकल्पिक मार्गों से भेज रहा है, जिससे यात्रा का समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यदि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी व्यवधान पैदा हुआ तो वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है.

सीजफायर टूटने के बाद बढ़ा संघर्ष

ताजा सैन्य कार्रवाई जून में हुए संघर्षविराम समझौते के टूटने के बाद शुरू हुई है. सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिका ने ईरान के विभिन्न हिस्सों में हमले तेज कर दिए हैं. वहीं, ईरान भी क्षेत्रीय ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है. ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका एक लंबे सैन्य संघर्ष में फंसता जा रहा है. अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और अपने सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

‘कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा अमेरिका’

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन अब भी कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, “अगर ईरान गंभीरता से बातचीत चाहता है तो अमेरिका भी तैयार है. लेकिन यदि वह हमारे या हमारे सहयोगियों के हितों को खतरे में डालता है तो हम अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएंगे.”

 



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