‘ये लोकतंत्र को कमजोर..’ EC के समर्थन में 400 से ज्यादा भारतीय मूल के छात्र-शिक्षाविद

‘ये लोकतंत्र को कमजोर..’ EC के समर्थन में 400 से ज्यादा भारतीय मूल के छात्र-शिक्षाविद


इलेक्शन कमीशन के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों की निंदा विदेश में रह रहे छात्रों, रिसचर्स और पूर्व छात्रों ने की है. इनकी कुल संख्या 400 से ज्यादा है. यह 27 देशों की यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं. उन्होंने इसे संस्थाओं में जनता के भरोसे को कमजोर करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिश करार दिया है. 

Spare India From Anarchy यानी भारत को अराजकता से बचाएं टाइटल वाले एक ज्वाइंट स्टेटमेंट में साइन करने वाले इन स्टूडेंट ने आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को चुनौती देने के लिए किए जा रहे, अराजकता से भरे प्रदर्शन हैं. सात ही उन्होंने चेतावनी दी है कि संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा करने के नाम पर उसे कमजोर करने का काम नहीं किया जाना चाहिए.

यह बयान ऐसे वक्त आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. 

मैंने जो देखा, वो परेशान करने वाला था: विक्रम बनर्जी

लंदन में हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर ओबीसी बीजेपी, यूके के संयोजक बिक्रम बनर्जी ने कहा है कि मैंने जो देखा, वह काफी परेशान करने वाला था. मुझे खुशी है कि सीजेपी, कांग्रेस, वामपंथी और नक्सली इकोसिस्सटम बेनकाब हो गया है ध्रुव राठी के विरोध प्रदर्शनों में हमने आईएसआई से जुड़े पाकिस्तान मुसलमानों की मौजूदगी देखी है. 

यह पूरी तरह से देश विरोधी है: बनर्जी

बनर्जी ने कहा है कि वहां युवा पीढ़ी का कोई भी व्यक्ति नहीं दिखा. वहां कांग्रेस के चार-पांच लगभग दस लोग थे. कुछ एसएफआई के वामपंथी लोग भी थे. यह पूरी तरह से देश विरोधी हैं. बाकी लोग भारत-विरोधी अलग-अलग समूहों और आईएसएसआई से जुड़े हुए थे. 



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