संसद भवन के भीतर अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल की तीखी नोकझोंक, जानें क्या है पूरा मामला?

संसद भवन के भीतर अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल की तीखी नोकझोंक, जानें क्या है पूरा मामला?


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • अखिलेश ने बोलने न देने पर कांग्रेस से प्रश्न पूछे।

संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन यानी बुधवार (22 जुलाई, 2026) को पेपर लीक और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला. सरकार ने सदन में इस पर चर्चा के लिए सहमति जताई, लेकिन विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा. इसी मुद्दे पर संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली.

सदन में पेपर लीक को लेकर क्या हुई चर्चा?

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने लोकसभा में कहा कि सरकार पेपर लीक और लाठीचार्ज जैसे मामलों पर चर्चा के लिए तैयार है. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का पक्ष जानना चाहा. केसी वेणुगोपाल ने साफ किया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर तभी चर्चा आगे बढ़ाएगी, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पद से इस्तीफा देंगे.

इसी दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सदन में अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला. इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं का है. अखिलेश यादव ने कहा कि अगर छात्रों की बात नहीं सुनी गई, तो वे सड़क पर उतरेंगे.

सदन में चर्चा को लेकर क्या बोले किरेन रीजीजू?

हंगामे के बीच किरेन रीजीजू ने दोहराया कि विपक्ष बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में चर्चा किस दिन और कितनी देरी के लिए करनी है, यह तय कर सकता है. हालांकि, लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. यहां तक की सदन की कार्रवाई संसद के कैमरे के सामने हुई, लेकिन कार्रवाई स्थगित होने के बाद भी जो सांसद संसद भवन मौजूद थे उनसे मिली जानकारी के मुताबिक, सदन कि कार्रवाई स्थगित होने के बाद सदन में अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल के बीच भी तीखी बहस हुई.

किस बात को लेकर अखिलेश और वेणुगोपाल की हुई नोकझोंक?

सदन में मौजूद सांसदों के मुताबिक, जब सदन की कार्रवाई स्थगित हो गई, तो उसके बाद अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस हो गई. अखिलेश यादव ने वेणुगोपाल से इसी बात पर आपत्ति जताई कि आखिर जब बड़ी पार्टी होने के नाते वह अपनी बात रख चुके थे, तो अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी को बोलने का मौका क्यों नहीं दिया? जबकि समाजवादी पार्टी विपक्ष की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. 

ऐसे में कांग्रेस नेता का यह बर्ताव सही नहीं था. अखिलेश यादव की बात सुनकर केसी वेणुगोपाल भी अखिलेश यादव से थोड़ा आक्रामक मुद्रा में बात करते हुए नजर आए. इसके बाद अखिलेश यादव और वेणुगोपाल के बीच नोकझोंक और ज्यादा बढ़ गई. 

जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने इस बात पर आपत्ति जताई कि बड़ी पार्टी होने के बावजूद समाजवादी पार्टी को बोलने का मौका क्यों नहीं दिया गया. साथ ही कांग्रेस ने भी उस दौरान समाजवादी पार्टी के पक्ष में आवाज क्यों नहीं उठाई. कुछ देर तक चली बहस के बाद कांग्रेस के नेताओं ने स्थिति को संभालने की कोशिश की. 

अखिलेश यादव ने क्या दी जानकारी?

बाद में मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सब कुछ ठीक है, लेकिन फ्लोर मैनेजमेंट में कुछ कमी जरूर रही. इसकी वजह से उन्होंने सदन में स्पीकर के सामने अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि यह मामला छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए और चर्चा तभी मुमकिन है, जब एक बार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो जाए.

कुल मिलाकर संसद के भीतर और बाहर, पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है. अब सवाल यह है कि क्या इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे या फिर मुद्दे के साथ-साथ सियासी श्रेय की राजनीति भी जारी रहेगी. 

यह भी पढ़ेंः बंगाल विधानसभा में भारी हंगामा, TMC विधायक कुणाल घोष को मार्शलों ने सदन से घसीटकर निकाला बाहर, जानें पूरा मामला





Source link