सतावर की खेती के लिए ट्रेनिंग देगी सरकार, पौधे भी मिलेंगे मुफ्त

सतावर की खेती के लिए ट्रेनिंग देगी सरकार, पौधे भी मिलेंगे मुफ्त


इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि किसानों को अपनी जेब से महंगे पौधे खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कृषि और उद्यान विभाग किसानों को सतावर के उन्नत पौधे बिल्कुल मुफ्त में बांटेगा. इससे शुरुआती लागत न के बराबर हो जाएगी और छोटे किसान भी बिना किसी आर्थिक जोखिम के इस फायदेमंद खेती की शुरुआत कर सकेंगे.

सिर्फ पौधे देना ही काफी नहीं होता इसलिए सरकार किसानों को सतावर की वैज्ञानिक खेती की पूरी ट्रेनिंग भी देगी. वर्कशॉप में विशेषज्ञों द्वारा सिखाया जाएगा कि खेत की तैयारी कैसे करें, बीजों और जड़ों का रोपण कब करें, सिंचाई का सही समय क्या है और कौन से जैविक खाद से फसल की पैदावार दोगुनी की जा सकती है.

सिर्फ पौधे देना ही काफी नहीं होता इसलिए सरकार किसानों को सतावर की वैज्ञानिक खेती की पूरी ट्रेनिंग भी देगी. वर्कशॉप में विशेषज्ञों द्वारा सिखाया जाएगा कि खेत की तैयारी कैसे करें, बीजों और जड़ों का रोपण कब करें, सिंचाई का सही समय क्या है और कौन से जैविक खाद से फसल की पैदावार दोगुनी की जा सकती है.

सतावर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी और सामान्य मिट्टी में भी बेहद आसानी से उग जाती है. इसे न तो ज्यादा देखरेख की दरकार होती है और न ही महंगे रासायनिक कीटनाशकों की. सबसे बढ़िया बात यह है कि जंगली जानवर और नीलगाय भी इस कंटीली फसल को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.

सतावर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी और सामान्य मिट्टी में भी बेहद आसानी से उग जाती है. इसे न तो ज्यादा देखरेख की दरकार होती है और न ही महंगे रासायनिक कीटनाशकों की. सबसे बढ़िया बात यह है कि जंगली जानवर और नीलगाय भी इस कंटीली फसल को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.

यह फसल खेत में करीब 12 से 18 महीने में पूरी तरह तैयार हो जाती है. इसके बाद इसकी जड़ों को खोदकर निकाला जाता है, जिन्हें छीलकर और सुखाकर बाजार में बेचा जाता है. एक एकड़ खेत से किसान आसानी से कई क्विंटल सूखी जड़ें निकाल लेते हैं. जिनका वजन और क्वालिटी ही किसान को मोटा मुनाफा दिलाती है.

यह फसल खेत में करीब 12 से 18 महीने में पूरी तरह तैयार हो जाती है. इसके बाद इसकी जड़ों को खोदकर निकाला जाता है, जिन्हें छीलकर और सुखाकर बाजार में बेचा जाता है. एक एकड़ खेत से किसान आसानी से कई क्विंटल सूखी जड़ें निकाल लेते हैं. जिनका वजन और क्वालिटी ही किसान को मोटा मुनाफा दिलाती है.

आयुर्वेद, यूनानी दवाओं और आधुनिक न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स में सतावर की भारी डिमांड है. कमजोरी दूर करने, महिलाओं की सेहत सुधारने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इसका जमकर इस्तेमाल होता है. देश की बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियां और स्थानीय पंसारी इसे हाथों-हाथ खरीदते हैं. इसलिए फसल बिकने को लेकर कोई झंझट या डर नहीं रहता.

आयुर्वेद, यूनानी दवाओं और आधुनिक न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स में सतावर की भारी डिमांड है. कमजोरी दूर करने, महिलाओं की सेहत सुधारने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इसका जमकर इस्तेमाल होता है. देश की बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियां और स्थानीय पंसारी इसे हाथों-हाथ खरीदते हैं. इसलिए फसल बिकने को लेकर कोई झंझट या डर नहीं रहता.

कमाई के गणित पर नजर डालें तो एक एकड़ में सतावर लगाकर किसान 4 से 6 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा बहुत आराम से कमा सकते हैं. चूंकि सरकार पौधे मुफ्त दे रही है और ट्रेनिंग भी फ्री है. इसलिए लागत बेहद सीमित रहती है और सीधे तौर पर बंपर बचत किसान की जेब में आती है.

कमाई के गणित पर नजर डालें तो एक एकड़ में सतावर लगाकर किसान 4 से 6 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा बहुत आराम से कमा सकते हैं. चूंकि सरकार पौधे मुफ्त दे रही है और ट्रेनिंग भी फ्री है. इसलिए लागत बेहद सीमित रहती है और सीधे तौर पर बंपर बचत किसान की जेब में आती है.

अगर आप भी इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं. तो अपने जिले के नजदीकी उद्यान विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से तुरंत संपर्क करें. वहां अपना रजिस्ट्रेशन कराकर आप मुफ्त पौधों और आगामी ट्रेनिंग सत्र की तारीखों की जानकारी ले सकते हैं.

अगर आप भी इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं. तो अपने जिले के नजदीकी उद्यान विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से तुरंत संपर्क करें. वहां अपना रजिस्ट्रेशन कराकर आप मुफ्त पौधों और आगामी ट्रेनिंग सत्र की तारीखों की जानकारी ले सकते हैं.

पारंपरिक खेती के ढर्रे से बाहर निकलकर आज के दौर में स्मार्ट और औषधीय खेती अपनाना ही समझदारी है. जब सरकार खुद मुफ्त पौधे, तकनीकी सलाह और ट्रेनिंग देकर हाथ थाम रही है. तो इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए. थोड़ी सी मेहनत और सही जानकारी से सतावर आपकी तकदीर बदल सकती है.

पारंपरिक खेती के ढर्रे से बाहर निकलकर आज के दौर में स्मार्ट और औषधीय खेती अपनाना ही समझदारी है. जब सरकार खुद मुफ्त पौधे, तकनीकी सलाह और ट्रेनिंग देकर हाथ थाम रही है. तो इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए. थोड़ी सी मेहनत और सही जानकारी से सतावर आपकी तकदीर बदल सकती है.

Published at : 03 Sep 2026 12:37 PM (IST)

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