Aja Ekadashi 2026: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है जो इस बार 7 सितंबर 2026 को है. एकादशी का व्रत करीब 24 घंटे तक क्यों रखा जाता है? क्या शास्त्रों में सचमुच 24 घंटे भूखा रहने का नियम है? क्या करने से एकादशी व्रत का फल मिलता है.
एकादशी सिर्फ भूखे रहने वाला व्रत नहीं
तिथि की अवधि सूर्य-चंद्रमा की गति पर आधारित होती है. एक तिथि का औसत समय करीब 23 घंटे 37 मिनट माना जाता है. एकादशी व्रत का आधार घड़ी के 24 घंटे नहीं बल्कि एकादशी तिथि है. एकादशी तिथि लगने से लेकर द्वादशी में विधिपूर्वक पारण करने तक व्रत करने की परंपरा है फिर चाहे वो 24 घंटे हो या उससे ज्यादा. व्रत का अर्थ ये नहीं कि सिर्फ भूखे रहने से एकादशी का फल मिल जाएगा.
एकादश्यां निराहारो व्रतं कुर्यात्समाहितः. विष्णुप्रीतिकरं ह्येतत् सर्वपापप्रणाशनम्॥
अर्थात एकादशी के दिन मन को एकाग्र करके निराहार रहकर व्रत करना चाहिए. शास्त्रीय परंपरा में ये दिन इंद्रियों पर नियंत्रण, भगवान विष्णु का स्मरण, सात्विक आहार, संयम और आत्मचिंतन का अवसर माना गया है. पद्म पुराण में एकादशी के दिन शरीर, वाणी और कर्म से संयम रखने पर भी जोर दिया गया है, तभी फल की प्राप्ति होती है.
24 घंटे का नियम कैसे समझें?
- एकादशी व्रत में दशमी तिथि से संयम शुरू करने और द्वादशी में पारण करने की परंपरा है.
- चूंकि एकादशी तिथि शुरू होने से लेकर द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक होती है इसलिए इस दौरान रात्रि जागरण का विधान बताया गया है.
- व्रती एकादशी के दिन अन्न का त्याग करता है और भगवान विष्णु का ध्यान, पूजा, जप तथा कथा-श्रवण करता है.
- कई परंपराओं में एकादशी की रात जागरण को भी विशेष महत्व दिया गया है.
अजा एकादशी में क्या है खास?
अजा एकादशी की कथा राजा हरिश्चंद्र और महर्षि गौतम से जुड़ी है. कथा के अनुसार कठिन परिस्थितियों में राजा हरिश्चंद्र ने महर्षि गौतम के कहने पर अजा एकादशी का व्रत और रात्रि-जागरण किया. पुराण में बताया गया है कि इस व्रत के प्रभाव से उनके पाप नष्ट हुए और उन्हें अपना राज्य तथा परिवार वापस प्राप्त हुआ.
नारद पुराण में भी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी बताते हुए इसके व्रत और द्वादशी के दिन भगवान उपेंद्र की पूजा का विधान बताया गया है. श्रद्धा से व्रत करने वाले को सांसारिक सुख और अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति का वर्णन मिलता है.
एकादशी व्रत रखने की सही विधि
- दशमी से संयम रखें – सात्विक भोजन करें और वाणी व व्यवहार में संयम रखें.
- अन्न का त्याग करें – सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रखा जा सकता है.
- भगवान विष्णु का स्मरण करें – पूजा, मंत्र-जप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
- मन को शांत रखें – क्रोध, विवाद, निंदा और गलत विचारों से बचें.
- सात्विक जीवनशैली अपनाएं – मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें.
- रात्रि जागरण कर सकते हैं – क्षमता हो तो भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करते हुए जागरण करें.
- दान-पुण्य करें – जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें.
- द्वादशी में पारण करें – पंचांग में दिए शुभ पारण समय के अनुसार व्रत खोलें.
- स्वास्थ्य का ध्यान रखें – बीमारी, गर्भावस्था, वृद्धावस्था या कमजोरी में कठोर निर्जल व्रत के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार व्रत करें.
FAQ
1. क्या अजा एकादशी पर पूरे 24 घंटे भूखा रहना जरूरी है?
नहीं, व्रत का आधार 24 घंटे नहीं बल्कि एकादशी तिथि से द्वादशी तक की अवधि है।
2. सिर्फ अन्न छोड़ने से एकादशी का फल मिल जाता है?
शास्त्रों में व्रत के साथ भगवान विष्णु का स्मरण, संयम, पूजा-जप और सदाचार को भी जरूरी माना गया है।
3. एकादशी की रात जागने का क्या महत्व है?
रात्रि जागरण को भगवान विष्णु के स्मरण और भक्ति का साधन माना गया है। कई परंपराओं में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
4. अजा एकादशी का राजा हरिश्चंद्र से क्या संबंध है?
मान्यता है कि अजा एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र के जीवन के संकट दूर हुए और उन्हें राज्य व परिवार की प्राप्ति हुई।
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