Per Capita Income: देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है लेकिन अभी भी देश के हर राज्य में लोगों की कमाई एक जैसी नहीं है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय के मामले में सिक्किम अभी देश का सबसे अमीर राज्य बना है, जबकि बिहार सबसे निचले पायदान पर है. रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि राज्यों के बीच आमदनी का अंतर अभी भी काफी बड़ा है. किसी राज्य की प्रति व्यक्ति आय बताती है कि वहां रहने वाले लोगों की औसत कमाई कितनी है. इससे उस राज्य की आर्थिक स्थिति और लोगों के लाइफस्टाइल का भी अंदाजा लगाया जाता है.
क्या है प्रति व्यक्ति आय?
किसी राज्य की टोटल इनकम को वहां की कुल आबादी से भाग देने पर जो आंकड़ा निकलता है, उसे ही प्रति व्यक्ति आय कहा जाता है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर व्यक्ति की कमाई उतनी ही है, लेकिन इससे राज्य की आर्थिक स्थिति का अंदाजा जरूर मिल जाता है.
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सिक्किम कैसे बना नंबर 1?
रिपोर्ट के अनुसार, सिक्किम ने प्रति व्यक्ति आय के मामले में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है. इसके पीछे के कारण की बात करें तो एक्सपर्ट्स इसे राज्य की छोटी आबादी, पर्यटन, जलविद्युत परियोजनाओं और मजबूत आर्थिक गतिविधियों को ही कारण मान रहे हैं. कम आबादी और अच्छे टैक्स के कारण ही यहां प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे ज्यादा है.
बिहार सबसे पीछे क्यों?
रिपोर्ट के साफ कहा हया है कि बिहार फिर से प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे नीचे है. इसकी वजह राज्य की बड़ती आबादी, कम औद्योगिक विकास और प्रति व्यक्ति कम आय को ही माना गया है. हालांकि, पिछले कुछ साल में बिहार की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में वो अभी भी दूसरे राज्यों से काफी पीछे है.
कौन- कौन से राज्य हैं आगे?
सिक्किम अकेला ही आगे नहीं है. इसके अलावा गोवा, दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों की प्रति व्यक्ति आय भी देश में सबसे ज्यादा है. इन राज्यों में उद्योग, आईटी, सेवा क्षेत्र और पर्यटन जैसी गतिविधियां मजबूत होने के कारण लोगों की एवरेज आय ज्यादा है.
समझें राज्य की तस्वीर-
प्रति व्यक्ति आय बढ़ने का मतलब ये माना जाता है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं और लोगों की औसत कमाई बढ़ रही है. हालांकि किसी राज्य की पूरी तस्वीर समझने के लिए रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनयापन की लागत जैसे दूसरे पहलुओं को भी देखना जरूरी होता है.






