पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित हिली-हकीमपुर चेक पोस्ट पर इन दिनों डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है. सीमा पार आने-जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है और कई परिवार खुद को पहचान और दस्तावेजों की समस्या में फंसा हुआ बता रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य में घुसपैठियों को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहस और सख्त कार्रवाई की चर्चाओं के बाद कई बांग्लादेश मूल के लोग भारत छोड़कर वापस लौटने लगे हैं.
हकीमपुर चेक पोस्ट पर मौजूद हृदय मोल्ला नाम के युवक ने दावा किया कि उनका परिवार कई सालों से पश्चिम बंगाल में रह रहा था, लेकिन अब दस्तावेजों की कमी की वजह से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनसे कहा है कि केवल मौजूदा दस्तावेज काफी नहीं हैं, बल्कि माता-पिता के 2002 से पहले के कागज भी दिखाने होंगे. हृदय ने कहा कि उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे और ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए उस समय जरूरी दस्तावेज नहीं बन पाए. उन्होंने बताया कि उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड और स्कूल के प्रमाण पत्र मौजूद हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पुराने दस्तावेज जरूरी हैं.
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बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीति तेज
हृदय मोल्ला ने कहा, ‘हम यहीं पले-बढ़े, यहीं पढ़ाई की, लेकिन अब कहा जा रहा है कि नागरिकता साबित करने के लिए पुराने कागज दिखाओ.’ इसी बीच पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक बैठक के बाद कहा कि जो लोग बांग्लादेशी हैं, उन्हें जल्द वापस लौट जाना चाहिए, नहीं तो सरकार कार्रवाई करेगी. शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में कोर्ट भेजने की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक पुलिस सीधे ऐसे लोगों को बीएसएफ के हवाले करेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध घुसपैठ की वजह से राज्य के संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और इसका नुकसान भारतीय नागरिकों को उठाना पड़ रहा है.
दस्तावेजों की जांच तेज हो गई है
सीमा क्षेत्र के कुछ लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में दस्तावेजों की जांच तेज हो गई है. कई मजदूर परिवार, जो लंबे समय से भारत में रह रहे थे, अब दबाव या डर की वजह से सीमा पार लौट रहे हैं. हालांकि प्रशासन की तरफ से किसी बड़े अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सीमा चौकियों पर बढ़ती गतिविधियों और लोगों की चिंताओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है. फिलहाल हिली-हकीमपुर बॉर्डर पर सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या कई सालों से भारत में रह रहे लोग सिर्फ दस्तावेजों की कमी के कारण अपनी पहचान और रहने की जगह खो देंगे.
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