Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व के साथ ही दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होने जा रहा है. भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद गणपति बप्पा को विदाई देते हैं और पवित्र नदी या जलाशयों में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर-जोधपुर) के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, 14 सितंबर 2026 से शुरू हुआ दस दिवसीय गणेशोत्सव 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन संपन्न होगा. 14 सितंबर को देशभर में भक्तों ने अपने घरों और पूजा पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की थी. यद्यपि कई स्थानों पर प्रतिमाओं का विसर्जन डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिन बाद भी किया जाता है, परंतु अधिकांश बड़े पंडालों और घरों में गणेश प्रतिमा की विदाई अनंत चतुर्दशी के दिन ही होती है.
भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और रवि योग का संयोग
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की विशेष परंपरा है. इस वर्ष अनंत चतुर्दशी पर ‘रवि योग’ का शुभ संयोग भी बन रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रवि योग में किए गए कार्यों से अभीष्ट और शुभ फल की प्राप्ति होती है.
शास्त्रीय नियमों के अनुसार श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार डेढ़, ढाई, 5, 7 अथवा 11 दिनों तक भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित रखते हैं. इस दौरान प्रतिदिन नियमपूर्वक पूजा-अर्चना व भोग अर्पित किया जाता है और अंत में चतुर्दशी तिथि को भावभीनी विदाई दी जाती है.
अनंत चतुर्दशी तिथि विवरण (पंचांग अनुसार)
- चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 24 सितंबर 2026, रात्रि 11:19 बजे
- चतुर्दशी तिथि का समापन: 25 सितंबर 2026, रात्रि 11:07 बजे
- उदयातिथि मान्यता: उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी का पर्व शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा.
ज्योतिषीय योग व नक्षत्र
- रवि योग: सुबह 06:11 बजे से 11:22 बजे तक
- शूल योग: सुबह से दोपहर 02:51 बजे तक (तत्पश्चात गण्ड योग आरंभ)
- शतभिषा नक्षत्र: सुबह 11:22 बजे तक (तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद नक्षत्र आरंभ)
गणेश विसर्जन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त
| चौघड़िया | निर्धारित समय |
| लाभ चौघड़िया (प्रातः) | सुबह 07:41 बजे से 09:11 बजे तक |
| अमृत चौघड़िया (प्रातः) | सुबह 09:11 बजे से 10:42 बजे तक |
| शुभ चौघड़िया (दोपहर) | दोपहर 12:12 बजे से 01:43 बजे तक |
| लाभ चौघड़िया (रात्रि) | रात 09:14 बजे से 10:44 बजे तक |
गणेश विसर्जन की शास्त्रीय पूजन विधि
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास के अनुसार विसर्जन से पूर्व इस विधि का पालन करें:
स्नान व संकल्प: चतुर्दशी के दिन प्रातः शीघ्र उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
दीपक प्रज्वलन: पूजा स्थल पर शुद्ध घी का दीपक जलाएं.
मंत्र जप: भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष बैठकर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें.
पूजन सामग्री अर्पण: प्रतिमा पर धूप, दीप, गंध, पुष्प, अक्षत तथा नैवेद्य अर्पित करें.
आरती व पाठ: गणेश चालीसा का पाठ करें और श्रद्धापूर्वक धूप-दीप से आरती संपन्न करें.
क्षमा प्रार्थना: अंत में भोग लगाकर 10 दिनों के दौरान जाने-अनजाने हुई किसी भी त्रुटि या भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें.
विसर्जन: पूजन संपन्न करने के पश्चात आदरपूर्वक बप्पा की प्रतिमा को समीप की किसी पवित्र नदी, सरोवर या स्वच्छ जलकुंड में ले जाकर विसर्जित करें.
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