- भारत में पहचान अनिवार्य, इस्तेमाल मुश्किल और दंडनीय है।
Burner Phone: अगर आपको लगता है कि मोबाइल फोन सिर्फ स्मार्टफोन और फीचर फोन तक ही सीमित हैं तो यह पूरी तस्वीर नहीं है. तकनीक की दुनिया में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई तरह के फोन बनाए जाते हैं. इन्हीं में एक खास कैटेगरी है जिसे बर्नर फोन कहा जाता है. आपने इस शब्द को कई फिल्मों और वेब सीरीज में जरूर सुना होगा जहां इसका इस्तेमाल गोपनीय बातचीत के लिए किया जाता है.
प्राइवेसी के लिए बनाया गया खास फोन
बर्नर फोन असल में ऐसा डिवाइस होता है जिसे सीमित समय के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है. इसका मुख्य फोकस यूजर की पहचान और बातचीत को निजी रखना होता है. आम फोन की तुलना में इसमें बहुत कम फीचर्स होते हैं लेकिन प्राइवेसी के लिहाज से इसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. इसे इस्तेमाल करने के बाद आमतौर पर फेंक दिया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है ताकि किसी भी तरह की जानकारी आगे ट्रेस न की जा सके.
क्यों कहा जाता है इसे ट्रैक करना मुश्किल?
बर्नर फोन की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जाती है कि इसे ट्रैक करना आसान नहीं होता. यह आमतौर पर बिना किसी लंबे समय के रजिस्ट्रेशन या पहचान के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया जाता है. इसकी कीमत भी अक्सर कम होती है क्योंकि इसमें एडवांस फीचर्स नहीं होते.
यह एक साधारण फीचर फोन की तरह काम करता है जिसमें कॉलिंग और मैसेजिंग जैसी बेसिक सुविधाएं ही मिलती हैं. कुछ मामलों में सीमित इंटरनेट एक्सेस भी दिया जाता है लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ कम्युनिकेशन तक ही सीमित रहता है.
आम फोन से कैसे अलग है?
जहां स्मार्टफोन में ऐप्स, सोशल मीडिया, कैमरा और कई स्मार्ट फीचर्स होते हैं वहीं बर्नर फोन बेहद साधारण होता है. इसमें न तो ज्यादा स्टोरेज होता है और न ही एडवांस टेक्नोलॉजी. इसकी सादगी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है क्योंकि इससे डेटा जमा होने की संभावना कम रहती है. इसके अलावा, इसे लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनाया जाता बल्कि जरूरत पूरी होते ही इसे बदल दिया जाता है.
भारत में इस्तेमाल करना क्यों मुश्किल है?
भारत में बर्नर फोन का इस्तेमाल करना आसान नहीं है. यहां सिम कार्ड लेने के लिए पहचान पत्र देना अनिवार्य होता है जैसे आधार कार्ड. ऐसे में बिना पहचान के फोन इस्तेमाल करना लगभग असंभव हो जाता है. अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है जिसमें भारी जुर्माना और जेल तक की सजा शामिल है.
क्या सच में पूरी तरह सुरक्षित होता है?
फिल्मों में इसे पूरी तरह अनट्रेसेबल दिखाया जाता है लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग हो सकती है. किसी भी डिवाइस को पूरी तरह ट्रैक-प्रूफ कहना सही नहीं है क्योंकि नेटवर्क और सर्विस प्रोवाइडर के जरिए कुछ जानकारी फिर भी जुड़ सकती है. फिर भी, सीमित इस्तेमाल और कम डेटा के कारण यह सामान्य फोन की तुलना में ज्यादा गोपनीयता देने वाला विकल्प माना जाता है.
समझदारी से करें तकनीक का इस्तेमाल
बर्नर फोन का असली उद्देश्य निजी बातचीत को सुरक्षित रखना है लेकिन इसका गलत इस्तेमाल भी संभव है. इसलिए तकनीक का इस्तेमाल हमेशा नियमों और जिम्मेदारी के साथ करना जरूरी है.
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