- महात्मा गांधी ने टैगोर को ‘गुरुदेव’ की उपाधि दी थी।
Rabindranath Tagore Jayanti 2026: रवींद्रनाथ टैगोर का नाम भारत के महानतम बुद्धिजीवियों में एक है. बंगाल की भूमि में जन्मे टैगोर ने साहित्य और कला क्षेत्र में अहम दर्जा प्राप्त किया. उन्होंने बांग्ला भाषा में कई कविताएं, उपन्यास, कहानियां आदि लिखे, जिसमें ‘गीतांजलि’ (Geetanjali) सबसे प्रसिद्ध काव्य संग्रह है.
गीतांजलि के लिए टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार भी मिला, जिसके बाद वे एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता (Nobel laureate Rabindranath Tagore) भी बनें. भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” (Jana Gana Mana) के रचयिता रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती को लेकर खासकर पश्चिम बंगाल में जोरों से तैयारियों चल रही है.
इस साल 2026 में रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती मनाई जाएगी. इस वर्ष टैगोर की जयंती इसलिए भी खास रहेगी, क्योंकि इसी दिन पश्चिम बंगाल (West Bengal) में जीत के बाद भाजपा (BJP) सरकार के मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह (West Bengal oath ceremony) भी होने वाला है.
लेकिन कई लोगों के मन में तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति है. इसका कारण यह है कि, ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 7 मई को मनाई जाती है. लेकिन कई जगहों पर 9 मई को भी रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई जाएगी. आइए जानते हैं 7 या 9 मई आखिर कब है रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती.
7 या 9 मई रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 2026 कब
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 7 मई, 1861 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता के जोरासांको हवेली में हुआ था. उनके पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर और मां का नाम शारदा देवी था. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, गुरु रवींद्रनाथ की जयंती हर साल भारत में 7 मई की तारीख को मनाई जाती है. लेकिन बंगाली कैलेंर के अनुसार, टैगोर का जन्म बोइशाख माह के 25 वें दिन, 1422 बंगाली युग में हुआ था. इसलिए पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 9 मई को मनाई जाएगी, जोकि वर्तमान में बोइशाख मास (वैशाख महीना) का 25वां दिन रहेगा. कोलकाता में टैगोर जयंती पोन्चीश बोइशाख (25वां वैशाख) के रूप में अधिक लोकप्रिय है. हालांकि, अन्य राज्यों में रवीन्द्रनाथ टैगोर जयन्ती 7 मई को ग्रेगोरियन कैलेण्डर के अनुसार मनायी जाती है.
रवींद्रनाथ टैगोर कैसे कहलाएं ‘गुरुदेव’
रवींद्रनाथ टैगोर को ‘गुरुदेव’ की उपाधि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) से मिली. इसलिए इन्हें गुरु रवींद्रनाथ भी कहा जाता है. रवींद्रनाथ के गांधी जी को महात्मा कहा था, जिसके बदले गांधी जी ने उन्हें ‘गुरुदेव’ कहकर संबोधित किया.
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