NCRB DATA Shows Crime Ration Against Women: भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध 2024 में भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं. आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक संकट की झलक है. NCRB के अनुसार, रेप के 15,609 मामले और महिलाओं के अपहरण/किडनैपिंग के 9,865 केस दर्ज हुए.
हालांकि, एक दिलचस्प ट्रेंड यह भी है कि क्राइम रेट (प्रति लाख आबादी) 66.2 से घटकर 64.6 हो गया. 19 महानगरों में कुल मामलों में 1.6% की गिरावट दर्ज की गई. कुल अपराध भी 37.6 लाख से घटकर 35.4 लाख रहे. यह गिरावट जमीनी खतरे को कम नहीं करती.
इस हिंसा का सबसे क्रूर चेहरा तब दिखता है जब मर्डर विद रेप/गैंगरेप के 422 मामले सामने आते हैं. जहां यौन अपराध सीधे हत्या में बदल जाते हैं. वहीं दहेज हत्या के 12,344 मामले यह साबित करते हैं कि घरेलू हिंसा अब भी जानलेवा है. सबसे ज्यादा मामले पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (2,59,054 केस) के हैं. जो यह बताता है कि महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा अक्सर घर के भीतर ही मौजूद है.
हत्या के मामले: यूपी-बिहार सबसे आगे
हत्या के मामलों में बड़े राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित दिखते हैं. इनमें उत्तर प्रदेश – 1,744, बिहार – 1,418, महाराष्ट्र – 1,150, मध्य प्रदेश – 964, राजस्थान – 912, पश्चिम बंगाल – 891, तमिलनाडु – 853, झारखंड – 794, कर्नाटक – 671, ओडिशा – 627 शामिल है.
उत्तर प्रदेश और बिहार मिलकर 3,100 से ज्यादा मामलों के साथ देश में सबसे ऊपर हैं, जो इन राज्यों में हिंसा के गहरे सामाजिक कारणों की ओर इशारा करता है. हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर अपराध दर में मामूली गिरावट दर्ज हुई, लेकिन क्षेत्रीय आंकड़े कई जगह खतरनाक उछाल दिखाते हैं.
बिहार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध 2023 के 22,952 से बढ़कर 2024 में 27,359 हो गए. इसी ट्रेंड की झलक पटना शहर में भी दिखती है, जहां किडनैपिंग/अपहरण के मामले 806 से बढ़कर 1,000 पहुंच गए—यानी शहरी इलाकों में जोखिम तेजी से बढ़ रहा है.
वहीं दूसरी ओर, कुछ राज्यों में सुधार भी दिखा है. आंध्र प्रदेश में मामले 22,418 से घटकर 19,952 हुए, जबकि असम में 12,070 से घटकर 10,546 तक गिरावट दर्ज की गई.
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रेप केस: दिल्ली सबसे खतरनाक शहर
महानगरों में यौन अपराधों का घनत्व बेहद ज्यादा है. इनमें दिल्ली – 1,058, जयपुर – 497, मुंबई – 411, हैदराबाद – 358, कोच्चि – 109, सूरत – 85, पटना – 72, अहमदाबाद – 62, कोझिकोड – 51 और चेन्नई – 44 शामिल है. दिल्ली लगातार शीर्ष पर है, जो इसे महिलाओं के लिए सबसे संवेदनशील शहरी क्षेत्र बनाता है.
अपहरण: जबरन शादी का खतरनाक ट्रेंड
अपहरण के मामलों में भी तस्वीर चिंताजनक है. इनमें दिल्ली – 4,647, बेंगलुरु – 878, मुंबई – 855, पटना – 478, पुणे – 289, नागपुर – 194, हैदराबाद – 194, चेन्नई – 111, सूरत – 62, अहमदाबाद – 10 शामिल हैं. देशभर में 18,520 मामले जबरन शादी के लिए अपहरण के दर्ज हुए. महानगरों में ही 757 केस सामने आए, जिनमें पटना (439) सबसे आगे है—यह एक विशिष्ट और चिंताजनक पैटर्न है.
न्याय प्रणाली: कार्रवाई तेज, फैसले धीमे
2024 के आंकड़े महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा के व्यापक परिदृश्य में एक मिली जुली तस्वीर पेश करते हैं. “ऑफेन्सेज अफेक्टिंग द ह्यूमन बॉडी” और “ऑफेन्सेज अगेंस्ट वूमेन एंड चाइल्ड” की संयुक्त श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर 2.5% की गिरावट दर्ज हुई—मामले 2023 के 11,85,915 से घटकर 2024 में 11,56,758 रह गए.
महानगरों में भी कुछ स्थिरता दिखी है. दिल्ली में अपहरण के मामले सबसे ज्यादा होने के बावजूद मामूली गिरावट के साथ 5,681 से 5,580 पर आ गए. वहीं, पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता अब भी सबसे बड़ा अपराध बना हुआ है, जो कुल मामलों का 27.2% हिस्सा है. जांच के स्तर पर सुधार के संकेत हैं—देशभर में चार्जशीटिंग रेट 77.2% तक पहुंचा, जो सक्रिय पुलिस कार्रवाई को दर्शाता है.
लेकिन अदालतों में तस्वीर चिंताजनक बनी हुई है. अपहरण के 98.2% और रेप के 97.6% मामले लंबित हैं, जबकि कुल 3.23 लाख से ज्यादा केस ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं. यानी, गिरफ्तारी और जांच के बाद न्याय की रफ्तार बेहद धीमी है, जिससे पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है और न्याय की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं.
अपराधी कौन: जान-पहचान ही सबसे बड़ा खतरा
NCRB 2024 के आंकड़े महिलाओं के खिलाफ अपराधों में एक बेहद चिंताजनक पैटर्न उजागर करते हैं—अधिकांश मामलों में आरोपी अजनबी नहीं, बल्कि परिचित होते हैं. रेप के करीब 96% मामलों में अपराधी वही होते हैं, जिन पर भरोसा किया जाता है—जैसे परिवार के सदस्य, दोस्त, पड़ोसी या पार्टनर. खास तौर पर “शादी का झांसा देने वाले दोस्त या लिव-इन पार्टनर” और अलग रह रहे पति इस श्रेणी में बड़ी संख्या में सामने आते हैं.
हत्या के मामलों में भी आरोपी अक्सर व्यक्तिगत विवाद (9,607 केस) या अवैध संबंधों से जुड़े होते हैं, जो यह दिखाता है कि हिंसा का बड़ा कारण निजी रिश्तों में तनाव है. वहीं, अपहरण/किडनैपिंग के 18,520 मामलों में मकसद जबरन शादी करना था, जबकि अन्य मामलों में बदला या फिरौती प्रमुख कारण रहे.
आरोपियों की उम्र मुख्य रूप से 18 से 60 वर्ष के बीच केंद्रित है. पुलिस हत्या और रेप मामलों में 80% से ज्यादा चार्जशीटिंग करती है, लेकिन अपहरण के मामलों में यह दर 30.9% तक गिर जाती है.
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