2024 NCRB Data Show Crime Against Women: 2024 के अपराध आंकड़े एक गहरी और असहज सच्चाई सामने रखते हैं. महिलाओं के खिलाफ हिंसा अब बाहरी खतरे से ज्यादा, निजी रिश्तों के भीतर पनप रही है. NCRB डेटा दिखाता है कि लिव-इन रिश्ते, प्रेम संबंध और शादी का झांसा जैसे संदर्भ कई गंभीर अपराधों- रेप, हत्या और अपहरण के केंद्र में हैं.
रेप और ‘शादी का झांसा’: भरोसे का दुरुपयोग
डेटा का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि ‘अजनबी खतरा’ अपेक्षाकृत दुर्लभ है. करीब 96% रेप मामलों में आरोपी पीड़िता का परिचित होता है. इनमें एक बड़ा हिस्सा दोस्त, ऑनलाइन संपर्क या लिव-इन पार्टनर का है, जहां शादी का वादा (pretext of marriage) एक प्रमुख पैटर्न के रूप में सामने आता है. देशभर में दर्ज 29,536 मामलों में अधिकांश अपराध पहले से मौजूद रिश्तों के भीतर हुए, जो यह बताता है कि विश्वास का टूटना ही अपराध की जड़ बन रहा है.
हत्या के पीछे ‘रिश्तों’ का तनाव
NCRB 2024 के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं से जुड़ी हत्या के मामलों में निजी रिश्ते एक केंद्रीय भूमिका निभाते हैं. डेटा के अनुसार, अवैध संबंध 1,155 मामलों में और प्रेम संबंध 902 मामलों में हत्या का प्रमुख कारण बने. यानी बड़ी संख्या में ऐसी घटनाएं हैं, जहां हिंसा की जड़ किसी न किसी व्यक्तिगत या भावनात्मक संबंध में छिपी होती है.
महानगरों की तस्वीर भी इससे अलग नहीं है. 98 हत्या के मामलों में अवैध संबंध सीधे तौर पर कारण के रूप में दर्ज हुए, जो यह दिखाता है कि शहरी जीवन की जटिलताओं में रिश्तों का तनाव और भी तीखा रूप ले सकता है.
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इन आंकड़ों का विश्लेषण यह संकेत देता है कि ईर्ष्या, विश्वासघात, अस्थिर संबंध और भावनात्मक असंतुलन कई बार नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं और हिंसा में बदल जाते हैं. खासकर गैर-विवाहिक या अस्थायी रिश्तों में, जहां सामाजिक और कानूनी ढांचा स्पष्ट नहीं होता, विवाद जल्दी उग्र हो सकता है.
अपहरण: प्रेम, दबाव और जबरन शादी
NCRB के मुताबिक, 18,520 मामले ऐसे दर्ज हुए, जिनमें महिलाओं का अपहरण शादी के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से किया गया. यह संख्या बताती है कि रिश्तों के नाम पर coercion (दबाव) एक बड़ा कारण बन चुका है. वहीं, 12,859 मामलों में ‘एलोपमेंट/लव रिलेशन’ का एंगल सामने आया—जहां कई बार सहमति और असहमति के बीच की रेखा विवाद का कारण बनती है. कई मामलों में परिवार की आपत्ति, सामाजिक मान्यताएं या रिश्ते का टूटना, अपहरण जैसे गंभीर अपराध का रूप ले लेता है.
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